देश की खबरें | रोगाणुरोधी के रूप में उपयोग की जाने वाली नैनो सामग्री बनाने की आसान प्रक्रिया विकसित

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नयी दिल्ली, 13 दिसंबर ‘भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान’ (आईआईएसईआर), भोपाल के शोधकर्ताओं की एक टीम ने चांदी के नैनो मेटेरियल (अति सूक्ष्म सामग्रियां) का उत्पादन करने के लिए एक सुरक्षित और आसान प्रक्रिया विकसित की है जिन्हें रोगाणुरोधी एजेंटों के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

काम के परिणाम अमेरिकन केमिकल सोसाइटी के प्रतिष्ठित जर्नल - एसीएस एप्लाइड मैटेरियल्स एंड इंटरफेसेज में प्रकाशित किए गए हैं।

आईआईएसईआर भोपाल में रसायन शास्त्र विभाग के प्राध्यापक सप्तर्षि मुखर्जी ने कहा, “विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोविड के बावजूद, आज मानव स्वास्थ्य के लिए जीवाणु एंटीबायोटिक प्रतिरोध को सबसे महत्वपूर्ण संकटों में से एक घोषित किया है। मनुष्यों, पशुओं और कृषि में एंटीबायोटिक दवाओं के बड़े पैमाने पर और अंधाधुंध उपयोग के कारण, 'दुनिया की रोगाणुरोधी प्रतिरोध राजधानी' समझे जाने वाले भारत के लिए यह समस्या गंभीर है। इसलिए, एंटीबायोटिक के विकल्प की सख्त आवश्यकता है, और नैनो-तकनीकी समाधान जिनपर आईआईएसईआर, भोपाल की टीम ने अनुसंधान किया है, वह उम्मीद देने वाले हैं।”

उन्होंने कहा, “ सामान्य सजावटी धातु, चांदी जब अति सूक्ष्म आकार के कणों के रूप में मौजूद होती है यानी जो इंसान के बाल की चौड़ाई से एक लाख गुना छोटा हो, तो उसमें अच्छे रोगाणुरोधी गुण होते हैं। चिकित्सकों ने प्राचीन काल से संक्रमण को रोकने और उपचार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न रूपों में चांदी का उपयोग किया है।”

मुखर्जी ने कहा कि आम तौर पर चांदी के नैनो-मेटेरियल जहरीले प्रीकर्सर (एक पदार्थ जिससे दूसरा पदार्थ बनता है) का उपयोग करके उत्पादित किए जाते हैं जो अक्सर प्रणाली के अंदर हानिकारक उप उत्पाद उत्पन्न करते हैं।

अनुसंधानकर्ताओं ने अमीनो एसिड, टाइरोसिन का उपयोग चांदी के नैनो सामग्री का उत्पादन करने के लिए किया जिसमें उत्कृष्ट रोगाणुरोधी गुण थे। टायरोसिन मांस, दूध के उत्पाद, बादाम आदि और बीन्स सहित कई खाद्य पदार्थों में मौजूद होता है।

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