विदेश की खबरें | ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को शून्य के स्तर तक पहुंचाने में विकसित देश निभाएं अग्रणी भूमिका:भारत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. भारत ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन का अधिकतम प्रभाव गरीब देश और कमजोर समुदाय झेल रहे हैं, जबकि वे इस संकट के लिए सबसे कम जिम्मेदार हैं।

संयुक्त राष्ट्र, 21 जुलाई भारत ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन का अधिकतम प्रभाव गरीब देश और कमजोर समुदाय झेल रहे हैं, जबकि वे इस संकट के लिए सबसे कम जिम्मेदार हैं।

भारत ने कहा कि विकसित देशों को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को शून्य के स्तर तक पहुंचाने के दुनिया के लक्ष्य को पाने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र ने इस बात पर जोर दिया है कि वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने के लिए, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 2030 तक 45 प्रतिशत तक कम करने और 2050 तक शून्य तक पहुंचाने की जरूरत है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव स्नेहा दुबे ने बुधवार को कहा, ‘‘ जलवायु परिवर्तन का अधिकतर असर सबसे गरीब देशों और सबसे कमजोर समुदायों द्वारा वहन किया जा रहा है, जबकि वे इस संकट के लिए सबसे कम जिम्मेदार हैं और जिनके पास इस स्थिति को बदलने के लिए वित्त, प्रौद्योगिकी और क्षमता की कमी है।’’

‘प्रेसिडेंट्स ऑफ द जनरल असेंबली एंड द इकोनॉमिक्स एंड सोशल काउंसिल’ की ‘द अफ्रीका वी वॉन्ट: रिकंफर्मिंग द डेवलपमेंट ऑफ अफ्रीका एज़ ए प्राययोरिटी ऑफ द यूनाईटेड नेशन्स सिस्टम’ विषय पर आधारित एक उच्च स्तरीय चर्चा में दुबे ने कहा कि विकासित देशों को अपने अनुभव से इसे शून्य तक ले जाने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘ वैश्विक स्तर पर इसे शून्य तक ले जाने का लक्ष्य समानता के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए....।’’

दुबे ने कहा, ‘‘ हम उम्मीद करते हैं कि अफ्रीकी देश इससे सहमत होंगे।’’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल ग्लासगो में सीओपी26 वैश्विक जलवायु शिखर सम्मेलन में कहा था कि भारत 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल कर लेगा।

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