ताजा खबरें | देवेगौड़ा ने सरकार से मनरेगा के लिए बजट आवंटन बढ़ाने को कहा

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा में सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने राष्ट्रपति अभिभाषण में देश के किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने के बारे में कोई उल्लेख नहीं होने पर हैरत जताते हुए सरकार से मांग की कि उसे अपनी इस घोषणा को पूरा करने के बारे में बताना चाहिए तथा आम बजट में मनरेगा के लिए आवंटन बढ़ाना चाहिए।

नयी दिल्ली, सात फरवरी राज्यसभा में सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने राष्ट्रपति अभिभाषण में देश के किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने के बारे में कोई उल्लेख नहीं होने पर हैरत जताते हुए सरकार से मांग की कि उसे अपनी इस घोषणा को पूरा करने के बारे में बताना चाहिए तथा आम बजट में मनरेगा के लिए आवंटन बढ़ाना चाहिए।

राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए जनता दल (एस) के वरिष्ठ नेता देवेगौड़ा ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है जिसमें देश का 50 प्रतिशत से अधिक कार्यबल नियोजित है तथा देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का 17 प्रतिशत योगदान है। उन्होंने कहा, ‘‘ भारत में 82 प्रतिशत छोटे एवं सीमांत किसान हैं जिनके पास औसत 1.08 हेक्टेयर का भूमि रकबा है।’’

उन्होंने कहा कि यदि देश का विकास करना है तो सरकार को कृषि क्षेत्र को समर्थन देकर इसका विकास करना होगा। उन्होंने कहा कि बदलती पर्यावरण परिस्थितियां, बाढ़, सूखा और भूजल का गिरता स्तर जैसी चुनौतियां के बावजूद किसानों ने 30.5 करोड़ टन अनाज और 32 करोड़ टन फलों एवं सब्जियों का उत्पादन किया।

उन्होंने कहा कि मनरेगा संप्रग सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है जिसके लिए आगामी वर्ष के बजट में आवंटन घटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि देश की एक बड़ी आबादी इस पर निर्भर है तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए यह बहुत आवश्यक योजना है। उन्होंने सरकार से मनरेगा के लिए बजट आवंटन में वृद्धि की मांग की।

उन्होंने कोविड-19 की चर्चा करते हुए कहा कि देश की एक बहुत बड़ी आबादी इससे प्रभावित हुई है और उनकी आय पर इसका असर पड़ा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इसे देखते हुए रोजगार के अवसर बढ़ाये जाने चाहिए।

देवेगौड़ा ने कहा कि सरकार ने 2022 तक देश के किसानों की आय को दोगुना करने का वादा किया था। किंतु राष्ट्रपति अभिभाषण में इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए किसी कार्यक्रम की घोषणा नहीं की गयी है।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘अभी तक हम खाद्य सुरक्षा की बात करते आये थे किंतु अब हम पौष्टिकता सुरक्षा की बात कर रहे हैं। खाद्य सुरक्षा तो संप्रग सरकार ही कर चुकी थी और यह कोई ऐसा नया काम नहीं है जो इस सरकार ने किया हो।’’

उन्होंने कहा कि बजट में कृषि क्षेत्र के लिए किए गए आवंटन से वे सब लोग बहुत निराश है जो उम्मीद कर रहे थे कि इस क्षेत्र में बजट आवंटनों में वृद्धि की जाएगी। उन्होने कहा कि 2022-23 के आम बजट में कृषि क्षेत्र के समग्र आवंटन में 3.8 प्रतिशत की कमी आयी है।

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र और सभी संबद्ध पक्षों की मांग थी की कृषि लागत और मूल्यवर्द्धित कृषि उत्पादों को ‘जीएसटी’ से मुक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किंतु राष्ट्रपति अभिभाषण में कोई उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कृषि एवं पेट्रोलियम पदार्थों पर सब्सिडी को बढ़ाने के बदले घटा दिया गया है। उन्होंने किसानों को उनकी उपज पर दिये जाने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि उर्वरक मुक्त खेती ऐसा विषय है जिस पर देश में व्यापक बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय परिप्रेक्ष्य में ड्रोन से रासायनिक छिड़काव उपयुक्त नहीं है क्योंकि भारत में 80 प्रतिशत से किसान छोटे एवं सीमांत किसान है। उन्होंने कहा कि यह जैविक खेती के खिलाफ है, जिसको बढ़ावा देने की सरकार बात कर रही है।

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