चंडीगढ़, 17 जून पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को वरिष्ठ अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि यदि किसी जिले में कोई अधिकारी भ्रष्ट या अवैध गतिविधि में संलिप्त पाया गया तो उस जिले के उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) इसके लिए जिम्मेदार होंगे।
मान ने लोगों को समयबद्ध तरीके से अपने काम करवाने में सुविधा प्रदान करने के लिए प्रत्येक जिले में एक 'मुख्यमंत्री सहायता केंद्र' खोलने की भी घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने सोमवार को यहां राज्य के सभी उपायुक्तों के साथ बैठक की।
मान ने इस बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि आदर्श आचार संहिता के कारण विकास कार्य प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के कारण दो महीने से अधिक समय तक आदर्श आचार संहिता लागू रही।
मान ने कहा कि उन्होंने बैठक में उपायुक्तों को लंबित कार्यों को पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने उपायुक्तों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि जिले में पटवारी जैसे सरकारी कार्यालयों में किसी को भी अपने काम करवाने में कोई परेशानी न आए।
मान ने कहा कि कुछ स्थानों से शिकायतें मिली हैं कि निचले स्तर पर अभी भी भ्रष्टाचार जारी है।
उन्होंने कहा, ‘‘ मुख्यमंत्री होने के नाते मैंने सख्त निर्देश दिए थे कि अगर किसी भी जिले में कोई भी अधिकारी किसी काम के लिए रिश्वत मांगता है और अवैध काम करता है तो इसके लिए उपायुक्त (डीसी) और एसएसपी जिम्मेदार होंगे और उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी। ’’
मान ने कहा कि राज्य सरकार आम जनता को पारदर्शी, उत्तरदायी और प्रभावी प्रशासन प्रदान करने के लिए बाध्य है।
मान ने 'मुख्यमंत्री डैशबोर्ड' स्थापित करने की भी बात कही और कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके वह यह जांच करेंगे कि क्या सरकारी अधिकारी अपने कार्यालयों में बैठकर लोगों को सेवाएं दे रहे हैं या नहीं।
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