निजी अस्पतालों की भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत बकाये के भुगतान की मांग
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जयपुर, 28 अप्रैल राजस्थान में निजी अस्पतालों ने राज्य की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना ‘भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना’ के तहत बकाये के भुगतान की मांग की है और कहा है कि बकाये का भुगतान नहीं होने पर उनके लिए मुश्किल होगी।

अस्पतालों ने कहा कि सरकार द्वारा भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत करीब 300 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना बाकी है। यह योजना गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों का निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज सुनिश्चत करती है।

इस योजना के तहत दावों का निपटारा एक साझेदार बीमा कंपनी द्वारा किया जाता है।

अस्पतालों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन ने बकाये के भुगतान के लिए सोशल मीडिया पर एक अभियान शुरू किया है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य प्राधिकारियों ने कहा कि निजी अस्पताल ऐसे समय सरकार पर दबाव बना रहे हैं जब वे कोरोना वायरस महामारी से निपटने में व्यस्त हैं।

निजी अस्पतालों के संगठन ने कहा है कि राज्य में लगभग 600 निजी अस्पताल बंद होने की कगार पर हैं और यदि सरकार ने बकाये का भुगतान नहीं किया तो 50,000 से अधिक कर्मचारी बेरोजगारी का सामना करेंगे।

यह मुद्दा राजस्थान के चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा द्वारा हाल ही में दिये गए उस बयान के बाद सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना मजबूत तरीके से चल रही है।

राज्य सरकार की भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत निजी अस्पतालों में बीपीएल परिवारों को नि:शुल्क चिकित्सीय उपचार की सुविधा दी गई है और बिलों का भुगतान साझेदार बीमा कंपनी द्वारा तय किया जाता है।

राजस्थान प्राइवेट हॉस्पिटल्स एसोशियेशन के उपाध्यक्ष विशेष व्यास ने पीटीआई— को बताया, ‘‘राज्य में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत निजी अस्पतालों को लगभग 300 करोड़ रूपये का भुगतान पिछले कई महीनों से बकाया है। बकाया बिलों के भुगतान के लिये हमने कई बार प्रशासन को लिखा है लेकिन भुगतान नहीं मिलने के कारण अस्पतालों को कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।’’

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