देश की खबरें | दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुंबई ट्रेन धमाका मामले की सरकारी रिपोर्ट मुहैया कराने से इंकार किया
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नयी दिल्ली, तीन फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट और डोजियर का आरटीआई कानून के तहत खुलासा नहीं किया जा सकता है, खासकर अगर इससे देश की संप्रभुता या अखंडता के साथ समझौते का जोखिम हो।
उच्च न्यायालय का यह आदेश मौत की सजा पाए दोषी एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी की उस याचिका को खारिज करते हुए आया, जिसमें 2006 के मुंबई ट्रेन बम विस्फोटों की जांच के संबंध में महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश सरकारों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट साझा करने का अनुरोध किया गया था।
उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि सूचना का अधिकार कानून के तहत आवेदक के साथ रिपोर्ट साझा नहीं की जाती है, तो यह निश्चित रूप से देश और उसके नागरिकों के हित में है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह ने मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) द्वारा पारित उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें अधिकारियों को मुंबई बम विस्फोट मामले के दोषी सिद्दीकी को सूचना प्रदान करने का निर्देश देने से इंकार कर दिया गया था।
दोषी ने दावा किया था कि उसे मामले में गलत तरीके से फंसाया गया था और यह उसके मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
उल्लेखनीय है कि 11 जुलाई, 2006 को मुंबई में वेस्टर्न लाइन की कई लोकल ट्रेन में सात विस्फोट हुए, जिससे 189 लोगों की मौत हो गई थी और 829 लोग घायल हुए।
सिद्दीकी ने वर्ष 2006 में बम धमाका मामले की जांच के संबंध में महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट या डोजियर की प्रति मांगी और साथ ही 2009 में बम धमाका मामले में इंडियन मुजाहिद्दीन से जुड़ी जांच को तत्कालीन आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट या डोजियर की प्रति मुहैया कराने की मांग की थी।
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