देश की खबरें | दिल्ली उच्च न्यायालय में आयुध फैक्टरी बोर्ड को निगमों में बदलने के खिलाफ दायर याचिका खारिज

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नयी दिल्ली, चार अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने आयुध फैक्टरी बोर्ड (ओएफबी) को सात निगमों में बदलने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह कदम राष्ट्रहित में उठाया गया था।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को जारी एक आदेश में कहा कि सशस्त्र बलों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद, हथियारों और गोला-बारूद की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करके रक्षा उत्पादन को मजबूत करने के लिए राष्ट्र के हित में ओएफबी का निगमीकरण किया गया था।

अदालत ने कहा कि भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ की याचिका पर हस्तक्षेप का कोई मामला नहीं बनता है। अदालत ने कहा कि नीति-निर्माण केवल कार्यपालिका का क्षेत्राधिकार है और यहां नागरिकों को दिए गए संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हुआ है।

वर्ष 2021 में रक्षा मंत्रालय ने एक अक्टूबर से ओएफबी को भंग कर दिया और इसकी संपत्ति, कर्मचारियों और प्रबंधन को सात सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (पीएसयू) में स्थानांतरित कर दिया था।

‘आत्मनिर्भर भारत’ पैकेज के हिस्से के रूप में केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि वह ओएफबी के निगमीकरण द्वारा आयुध आपूर्ति में स्वायत्तता, जवाबदेही और दक्षता में सुधार करेगी।

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