ताजा खबरें | दिल्ली विधेयक चर्चा छह रास
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. उन्होंने कहा कि यदि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ना होते तो दिल्ली में एक भी फ्लाई ओवर नहीं बन पाता। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली की आप सरकार ने बजट में आवंटन के बावजूद यहां कूड़े के पहाड़ को हटाने के लिए कोई पैसा जारी नहीं किया।
उन्होंने कहा कि यदि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ना होते तो दिल्ली में एक भी फ्लाई ओवर नहीं बन पाता। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली की आप सरकार ने बजट में आवंटन के बावजूद यहां कूड़े के पहाड़ को हटाने के लिए कोई पैसा जारी नहीं किया।
उन्होंने कहा कि आप सरकार ने दिल्ली की जनता के साथ कई तरह से वादाखिलाफी की। अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली की आप सरकार के नौ साल हो गये किंतु उन्होंने आज तक दिल्ली में यमुना नदी में आने वाली बाढ़ को रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया।
भाजपा सदस्य ने मोहल्ला क्लीनिक का उल्लेख करते हुए कहा कि हाल में कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री ऐसे ही एक क्लीनिक में गये और ट्वीट कर कहा कि वह वहां जाकर निराश हुए।
उन्होंने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और डॉ भीमराव आंबेडकर के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि दोनों ने ही दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने से असहमति व्यक्त की थी।
अग्रवाल ने दावा किया कि यह विधेयक दिल्ली सरकार को अधिकार संपन्न बनायेगा।
भारत राष्ट्र समिति सदस्य के केशव राव ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि सरकार ने अध्यादेश लाने के लिए उच्चतम न्यायालय के अंतिम कार्य दिवस का समय चुना। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से देश एक नये दौर में प्रवेश कर रहा है जिसमें नौकरशाही हावी हो जाएगी।
राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा ने केंद्र की सत्तारूढ़ सरकार से पूछा कि वह इतनी सारी सत्ता लेकर क्या करेगी? उन्होंने कहा कि निरपेक्ष रहने की बात की जाती है किंतु जब चूहे की पूंछ पर हाथी का पांव पड़ जाए तो चूहे से निरपेक्षता की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
उन्होंने कहा, ‘‘हम इंडियन मुजाहिद्दीन नहीं हैं, हम ईस्ट इंडिया कंपनी नहीं हैं। हम भारत के समान एक महासागर हैं।’’ उन्होंने कहा कि यदि नौकरशाही मंत्रियों के प्रति जवाबदेह नहीं होगी तो क्या अराजकता नहीं फैल जाएगी?
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि संविधान में यह परिकल्पना नहीं की गयी है कि राज्यपाल सत्ता का केंद्र होगा बल्कि उसे चुनी गयी सरकार की सलाह पर काम करना होता है।
उन्होंने कहा कि संविधान में राष्ट्रपति को भी निर्बाध अधिकार नहीं दिये गये हैं किंतु इस विधेयक में अधिनायकवाद को जन्म दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का अर्थ सत्ता का विकेंद्रीकरण होता है किंतु इस विधेयक में सारे अधिकार एक अधिकारी को दिए जा रहे हैं।
जनता दल (यू) के अनिल प्रसाद हेगड़े ने कहा कि इस विधेयक के प्रावधानों से दो अधिकारी दिल्ली की सरकार के चुने हुए अधिकारों को छीन लेंगे। उन्होंने इस विधेयक को अलोकतांत्रिक करार दिया।
केरल कांग्रेस (एम) सदस्य जोस के मणि ने दावा किया कि इस विधेयक को राजनीतिक मकसद से लाया गया है और इससे संसदीय लोकतंत्र को नकारा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके जरिये देश के संघवाद को कमतर किया जा रहा है।
उन्होंने प्रश्न किया कि यदि भाजपा दिल्ली में सत्ता में होती तो क्या वह इस विधेयक को स्वीकार करती?
कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य पी चिदंबरम ने विधेयक को असंवैधानिक करार देते हुए केंद्र सरकार को इस विधेयक को आगे नहीं बढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कानून मंत्रालय जानता है कि यह विधेयक संविधान के विरूद्ध है। उन्होंने इसकी तुलना पतंगे से की जो बार-बार दीपक के पास जाता है।
उन्होंने कहा कि यह राज्यसभा है और यहां के सदस्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के हितों की रक्षा करने के प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार दिल्ली में उपराज्यपाल निर्वाचित सरकार की मदद एवं परामर्श से काम करेंगे। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के जरिये इन जादुई शब्द ‘‘मदद एवं परामर्श’’ को खत्म किया जा रहा है।
पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि सत्ता पक्ष की ओर से इस विधेयक की किसी विशेषता के बारे में नहीं बताया गया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को पारित कर ‘‘हम संवैधानिक मशीनरी को खत्म कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि सरकार के पास इस विधेयक को लाने का नैतिक अधिकार भी नहीं है। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष तक शीला दीक्षित की सरकार रही और उसके बाद आप पार्टी की सरकार आ गयी। उन्होंने कहा कि 1998 से भाजपा दिल्ली में सत्ता में नहीं है।
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