ताजा खबरें | दिल्ली विधेयक चर्चा सात रास

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. उन्होंने कहा कि यह अनुच्छेद अपने आप में व्यापक है और यह दिल्ली के बारे में कानून बनाने का अधिकार संसद को देता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक दिल्ली के दर्जे के बारे में बताता है और सेवाओं के तबादले से संबंधित है।

उन्होंने कहा कि यह अनुच्छेद अपने आप में व्यापक है और यह दिल्ली के बारे में कानून बनाने का अधिकार संसद को देता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक दिल्ली के दर्जे के बारे में बताता है और सेवाओं के तबादले से संबंधित है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के बेहतर प्रशासन के लिए यह विधेयक लाया गया है और इसमें गलत कुछ भी नहीं है।

आईयूएमएल के अब्दुल वहाब ने दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2023 पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि अगले आम चुनाव में आठ से दस महीने बचे हैं और ऐसे में यह विधेयक अभी लाने की क्या आवश्यकता है?

उन्होंने कहा ‘‘देश में ज्वलंत मुद्दे हैं जिन पर चर्चा होनी चाहिए। मणिपुर में जातीय हिंसा, हरियाणा के नूंह में हुई हिंसा.... जैसे मुद्दों पर चर्चा जरूरी है, यह विधेयक जरूरी नहीं है।’’

वहाब ने कहा कि वह सरकार से यह विधेयक वापस लेने का अनुरोध करते हैं।

मनोनीत सदस्य रंजन गोगोई ने कहा कि यह मामला सर्वोच्च अदालत में लंबित नहीं है बल्कि जो लंबित है वह अध्यादेश की संवैधानिकता को लेकर है। इस मामले का सदन में हो रही बहस से कोई सरोकार नहीं है।

उन्होंने कहा कि जहां तक न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संबंध का सवाल है तो संविधान के अनुच्छेद 105, 121, 122 में इस बारे में स्पष्ट व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार कहा जा सकता है कि सदन के सदस्यों को इस मुद्दे पर चर्चा करने का और अपने विचार रखने का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 239 एए में दी गई व्यवस्था के अनुसार, संसद के अधिकार पर सवाल नहीं उठाया जा सकता और न ही यह विधेयक संविधान के मूल ढांचे पर कोई आघात करता है। उन्होंने कहा कि इस अनुच्छेद को अदालत में चुनौती भी नहीं दी जा सकती।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की डॉ फौजिया खान ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह विधेयक लोकतांत्रिक ढांचे और संघीय ढांचे की नींव को कमजोर करता है क्योंकि यह सीधे सीधे लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित एक सरकार को कमजोर करता है।

उन्होंने कहा कि क्या यह विधेयक मतदान करने वाले मतदाताओं के साथ धोखा नहीं है? उन्होंने कहा ‘‘ जब लोगों ने एक सरकार को चुना है, उसके पक्ष में मतदान किया है तो हम उस सरकार को कमजोर करने वाले कौन होते हैं ?’’

उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने बहुत ही वैयक्तिक टिप्पणी की है। उन्होंने कहा ‘‘अगर मुख्यमंत्री से कोई चूक भी हुई है तो क्या यह बात इस विधेयक को लाने का आधार हो सकती है ? क्या हम लोकतंत्र की भावना को मजबूत करने के बजाय उसे कमजोर नहीं कर रहे हैं ?’’

जारी

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