जरुरी जानकारी | सोयाबीन, सीपीओ, पामोलीन में गिरावट, सोयाबीन तिलहन में सुधार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. देश के तेल-तिलहन बाजारों में बुधवार को कारोबार का मिला जुला रुख रहा। एक ओर जहां सरसों और मूंगफली तेल-तिलहन कीमतें पूर्वस्तर पर बनी रही वहीं किसानों के नीचे भाव पर बिकवाली कम करने से सोयाबीन तिलहन कीमत मामूली सुधार हुआ।
नयी दिल्ली, चार अक्टूबर देश के तेल-तिलहन बाजारों में बुधवार को कारोबार का मिला जुला रुख रहा। एक ओर जहां सरसों और मूंगफली तेल-तिलहन कीमतें पूर्वस्तर पर बनी रही वहीं किसानों के नीचे भाव पर बिकवाली कम करने से सोयाबीन तिलहन कीमत मामूली सुधार हुआ।
बाजार सूत्रों ने कहा कि त्योहारी मांग के बावजूद बंदरगाहों पर आयात लागत से कम दाम पर बिकवाली करने के दवाब में सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन कीमतों में गिरावट रही। सोयाबीन तेल की नरमी के कारण बिनौला तेल भी हानि के साथ बंद हुआ।
मलेशिया एक्सचेंज में अधिक घट बढ़ नहीं है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में गिरावट है।
सूत्रों ने कहा कि देश में सभी खाद्य तेलों की त्योहारी मांग होने के बावजूद किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे दाम पर बिकवाली कम कर रहे हैं। इस कारण से सोयाबीन तिलहन में सुधार आया। दूसरी तरफ, आयातकों द्वारा बैंकों के भुगतान के दवाब की वजह से आयात की लागत से सस्ते दाम पर बेपड़ता बिकवाली पिछले लगभग पांच महीनों से जारी रहने के बीच सीपीओ, पामोलीन, सोयाबीन तेल और बिनौला तेल कीमतों में गिरावट दर्ज हुई।
उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 45-50 प्रतिशत खाद्यतेलों की कमी को आयात से पूरा किया जाता है और आयातकों, तेल मिलों के बुरे हालात का इससे बड़ा क्या प्रमाण हो सकता है कि इन आयातकों को, बाजार में त्योहारी मांग के बावजूद बंदरगाहों पर आयातित खाद्यतेल लागत से कम दाम पर बेचने की मजबूरी हो।
थोक कीमतों में गिरावट के बावजूद उपभोक्ताओं को खुदरा बाजार से यही सस्ता तेल पर्याप्त महंगा खरीदना पड़ रहा है। थोक बाजार के सस्ता होने के बावजूद खुदरा बाजार महंगा बना हुआ है। यानी मौजूदा स्थिति पूरे तेल तिलहन उद्योग के लिए परेशानी का सबब बन सकता है जिसे महसूस अगले कुछ सालों के बाद किया जायेगा।
सूत्रों ने कहा कि अगर सरकार सोचती है कि कुछ महीनों के बाद आयात शुल्क बढ़ाकर स्थिति को नियंत्रित कर लेगी तो ऐसा करना बेहद मुश्किल काम होगा क्योंकि इससे किसानों का विश्वास नहीं लौटाया जा सकेगा और वे किसी अन्य लाभकारी फसल का रुख कर चुके होंगे। इस बात को हमें सूरजमुखी और मूंगफली की खेती से जोड़कर समझना होगा जिनके न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भारी वृद्धि किये जाने के बावजूद इन फसलों की खेती का रकबा मौजूदा समय में काफी कम रह गया है।
बुधवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,525-5,575 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 7,475-7,525 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 18,025 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,640-2,925 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,150 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,725 -1,820 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,725 -1,835 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 9,500 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,400 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 7,900 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 7,750 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,500 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,000 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 8,100 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 4,725-4,825 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,325-4,525 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।
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