देश की खबरें | ऋण धोखाधड़ी: एसबीआई के छह अधिकारियों, नासिक की रियल इस्टेट कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बैंक के साथ 23.86 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक के छह अधिकारियों और नासिक स्थित रियल एस्टेट कंपनी सन इन्फ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ मामला दर्ज किया है और छापेमारी के दौरान एक आरोपी से 50 लाख रुपये से अधिक की नकदी बरामद की है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, चार अगस्त केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बैंक के साथ 23.86 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक के छह अधिकारियों और नासिक स्थित रियल एस्टेट कंपनी सन इन्फ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ मामला दर्ज किया है और छापेमारी के दौरान एक आरोपी से 50 लाख रुपये से अधिक की नकदी बरामद की है।

अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि सीबीआई ने बैंक अधिकारियों शैलेन्द्र कुमार, अब्बास मोरबी, प्रशांत बी वरदकर, अरुण एस भगत, एम एम के राव और शिवाजी मुर्कुटे के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन अधिकारियों के खिलाफ सक्षम प्राधिकारी के मुकदमा चलाने की मंजूरी दिए जाने के बाद यह मामला दर्ज किया गया है।

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अधिकारियों ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक को लगभग 23.86 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के लिए सन इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ सोमवार को मामला दर्ज करने के बाद जांच एजेंसी ने कई शहरों में 11 स्थानों पर छापेमारी की।

यह छापेमारी चार शहरों मुंबई, नासिक, बेंगलुरु, नागपुर में स्थानों पर की गई।

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उन्होंने कहा कि सीबीआई की प्राथमिकी में कंपनी के निदेशकों- अनिल बी. जैन, अनंत केशव राजेगांवकर, बिट्टू महगिलाल सिंघी, अमित गुप्ता और पवन कुमार बंसल का नाम शामिल है।

मामला नासिक में एक आवासीय परियोजना के निर्माण के लिए स्वीकृत ऋण में कथित अनियमितताओं से संबंधित है, जिसके लिए एक अन्य संपत्ति गिरवी के रूप में रखी गई थी।

आरोप लगाया गया है कि इस परियोजना में खर्च के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट का प्रमाणपत्र 54.32 करोड़ रुपये था, जबकि चार्टर्ड इंजीनियर प्रमाणपत्र में बताई गई लागत 23.75 करोड़ रुपये थी।

उन्होंने कहा कि यह पाया गया कि 2016 में गतिविधि का स्तर और परियोजना की स्थिति ऋण के वितरण के अनुसार नहीं थी।

उन्होंने कहा कि कंपनी ने इमारत की योजना कथित तौर पर बदल दी और वाणिज्यिक क्षेत्र के निर्माण को कम कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इमारत योजना में परिवर्तन से गिरवी का मूल्य कम हो गया और ऐसा बैंक की सहमति के बिना किया गया।

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