देश की खबरें | राजस्थान विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्षी कांग्रेस के बीच गतिरोध जारी
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जयपुर, 25 फरवरी राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी मंगलवार को सदन में भावुक हो गए और कहा कि उन्होंने कभी पक्षपात नहीं किया और फिर भी अगर अनुचित शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है तो यह दुखद है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा सोमवार को सदन में कहे गये शब्दों की ओर इशारा करते हुए देवनानी ने कहा कि सदन के अंदर इस्तेमाल किए गए शब्द गंभीर और अपमानजनक हैं।
उन्होंने कहा कि यह उनका अपमान नहीं बल्कि आसन का अपमान है।
देवनानी ने कहा, ‘‘मैंने कभी भी पक्षपात नहीं किया और ना करूंगा इसके बाद भी यदि इस तरह के शब्द सुने जायें तो मन को पीड़ा होना स्वाभाविक है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ लोगों ने मुझे इस असाधारण आसन तक पहुंचाया… मैं तो एक छोटा सा कार्यकर्ता था… एक कॉलेज में पढ़ाता था.. कभी कल्पना नहीं की थी कि यहां तक पहुंचूंगा.. लेकिन मुझे आपने पहुंचाया...ऐसे शब्द सुनने के लिये तो मैं आसन पर नहीं आया हूं…अध्यक्ष नहीं बना हूं इसलिये अब आप लोगों पर छोड़ता हूं कि इस पर क्या किया जाये... कैसे किया जाये….कौन करे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘एक दल के प्रदेश अध्यक्ष के भाषण के इन शब्दों को मैं दोहरा नहीं सकता। अखबारों में सबने पढ़ा है। वह शब्द सदन के अंदर ही कहे गए हैं चाहे सदन की कार्यवाही चल रही हो चाहे नहीं चल रही हो। लेकिन, सदन में बोले जाने वाले शब्द बहुत गंभीर हैं और अपमान जनक हैं।’’
देवनानी ने कहा, ‘‘मेरा अपमान नहीं हुआ है। इस आसन का अपमान हुआ है। अब यदि हम इस आसन का अपमान चाहते हैं तो निश्चित रूप से इस बात को मैं स्पष्ट करना चाह रहा हूं कि जो कुछ सदस्य ने कहा, क्या करेंगे आप लोग यह सदन तय करे। लेकिन ऐसा व्यक्ति सदन के सदस्य बने रहने योग्य नहीं है। अब उसके लिए क्या किया जाए, क्या नियम है सदन को तय करना है।’’
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और भाजपा विधायक गोपाल शर्मा ने डोटासरा की सदस्यता समाप्त करने की मांग की, जबकि अन्य दलों के सदस्यों ने इस घटना की निंदा की।
राजस्थान विधानसभा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी कांग्रेस के नेताओं के बीच गतिरोध मंगलवार को भी जारी है और कांग्रेस के छह निलंबित विधायकों को सदन में प्रवेश नहीं करने दिया गया।
निलंबित विधायकों का समर्थन कर रहे कांग्रेस के अन्य विधायक भी विधानसभा में प्रवेश नहीं कर पाए। कांग्रेस विधायक विधानसभा परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
इस बीच, कांग्रेस के बहिष्कार के बीच सदन की कार्यवाही जारी रही।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मंगलवार को विधानसभा के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में कहा, " जिस बात को लेकर गतिरोध हुआ था, मंत्री की वह टिप्पणी आज भी कार्यवाही में मौजूद है और मंत्री एक शब्द नहीं बोल रहे हैं।’’
डोटासरा ने कहा, ‘‘ हमारी मांग आज भी वही है कि मंत्री माफी मांगे… उनके द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री के लिये कहे गये शब्दों को कार्यवाही से हटाया जाए और फिर हमारा निलंबन रद्द कर सदन चले।’’
डोटासरा ने कहा, ‘‘ सदन इनको (सरकार को) चलाना है… इनकी आंतरिक कलह है …मुख्यमंत्री की… विधानसभा अध्यक्ष की…, वसुंधरा की…, किरोड़ी मीणा की… उसके चक्कर में पूरे राजस्थान के मुद्दों को नजरअंदाज करना चाहते हैं।’’
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने संवाददाताओं से कहा, "सदन में गतिरोध को समाप्त करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विपक्ष के नेता दिशाहीन हो गए हैं और अनावश्यक मुद्दों पर गतिरोध पैदा कर रहे हैं, उन्हें सदन चलाने में मदद करनी चाहिए।"
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता अपनी अंदरूनी लड़ाई को सदन में लाना चाहते हैं।
विपक्षी कांग्रेस ने मंत्री से माफी मांगने और विधायकों का निलंबन रद्द करने की मांग की है। विधानसभा में गतिरोध समाप्त करने के लिए अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के कक्ष में सत्तारूढ़ भाजपा के नेताओं और विपक्षी कांग्रेस नेताओं के बीच कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन मामला सुलझ नहीं सका, क्योंकि निलंबित कांग्रेस विधायक और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बयान से अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री संतुष्ट नहीं थे।
बाद में विपक्षी कांग्रेस ने दिनभर के लिए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। सदन की कार्यवाही सोमवार को व्यवधान के बीच चार बार स्थगित की गई थी।
उल्लेखनीय है कि मंत्री अविनाश गहलोत ने शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास संबंधी एक प्रश्न का उत्तर देते समय विपक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा था, ‘‘2023-24 के बजट में भी आपने हर बार की तरह अपनी ‘दादी’ इंदिरा गांधी के नाम पर इस योजना का नाम रखा था।’’
इस टिप्पणी के कारण सदन में भारी हंगामा हुआ था, और सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। हंगामे के कारण प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, रामकेश मीणा, अमीन कागजी, जाकिर हुसैन, हाकम अली और संजय कुमार सहित छह कांग्रेस विधायकों को सदन से निलंबित कर दिया गया था।
सदन की बैठक स्थगित होने के बाद कांग्रेस विधायकों ने मंत्री से माफी मांगने और निलंबन रद्द करने की मांग करते हुए विधानसभा में धरना शुरू कर दिया था।
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