देश की खबरें | दलाई लामा 'शांति के दूत'; तिब्बती लोगों के लिए और योगदान देने की जरूरत : रीजीजू
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नयी दिल्ली, 23 फरवरी केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरेन रीजीजू ने तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा को ‘‘शांति का दूत’’ बताते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि तिब्बतियों के हितों के लिए महत्वपूर्ण योगदान देने की जरूरत है।
तिब्बती बौद्ध नववर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रीजीजू ने यह भी कहा कि भारत सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे तिब्बती समुदाय तक भी पहुंचाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "तिब्बती लोग जानबूझकर भारत में कभी भी समस्याएं पैदा नहीं करते हैं। वे बहुत शांतिप्रिय लोग हैं और दलाई लामा शांति के दूत हैं। वह दुनिया में सबसे प्रिय और सम्मानित व्यक्ति हैं।"
चीन ने अतीत में दलाई लामा को "भिक्षु के वेश में भेड़िया", "डबल डीलर" और "अलगाववादी प्रमुख" की संज्ञा दी थी। दलाई लामा चीन से तिब्बत को "अलग करने" की मांग कर रहे हैं।
रीजीजू ने दलाई लामा के लंबे और स्वस्थ जीवन के लिए प्रार्थना करते हुए कहा कि आध्यात्मिक नेता के विचारों का व्यापक रूप से सम्मान किया जाता है और दुनिया भर में उन्हें स्वीकार किया जाता है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार तिब्बत से विस्थापित हुए समुदाय के जीवन को आसान बनाने के लिए समय-समय पर तिब्बती शरणार्थी नीति की समीक्षा कर सकती है।
उन्होंने दिल्ली की तिब्बती बस्ती ‘मजनूं का टीला’ में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, "हमें तिब्बतियों के हितों के मामले में महत्वपूर्ण योगदान देने की जरूरत है।"
उन्होंने कहा, "एक दिन आप सम्मान के साथ एक निश्चित जगह पर रहेंगे और सम्मानजनक जीवन जीएंगे।"
मंत्री ने कहा कि भारत सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को मानवीय आधार पर भारत में रह रहे बड़े तिब्बती समुदाय तक भी पहुंचाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि तिब्बती लोग भारत के विभिन्न हिस्सों में फैले हुए हैं और वे बहुत मेहनती और सफल हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने तिब्बती शरणार्थी नीति को परिष्कृत किया है और वह (रीजीजू) भारत में कई तिब्बती बस्तियों का दौरा करने वाले पहले केंद्रीय मंत्री हैं।
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि दुनिया शांति चाहती है, लेकिन अगर किसी का अधिकार छीन लिया जाए तो शांति कायम नहीं हो सकती। कुमार भारत-तिब्बत सहयोग मंच के संरक्षक भी हैं।
उन्होंने चीन की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘अगर किसी का अधिकार छीन लिया जाएगा तो शांति संभव नहीं है।’’
कुमार ने कहा, "किसी को भी दूसरे का अधिकार नहीं छीनना चाहिए, यह न केवल हिमालयी क्षेत्र या एशिया के लिए, बल्कि हर जगह के लिए है। सद्भाव के लिए शांति जरूरी है।"
इस अवसर पर निर्वासित तिब्बती सरकार के एक मंत्री ग्यारी डोलमा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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