देश की खबरें | माकपा ने के-रेल परियोजना के खिलाफ अभियान चलाने पर मुरलीधरन को आड़े हाथ लिया

तिरुवनंतपुरम, तीन अप्रैल केरल में सत्तारूढ़ माकपा ने रविवार को केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन को आड़े हाथ लिया जो राज्य में उसकी महत्वकांक्षी सिल्वरलाइन परियोजना के खिलाफ अभियान चला रहे हैं।

माकपा ने कहा कि उनका विरोध देश के संघीय ढांचे के सिद्धांत के खिलाफ है।

माकपा ने कहा कि के-रेल परियोजना के लिए भूमि सर्वेक्षण का कार्य केंद्र सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद शुरू किया गया और यहां तक कि उच्चतम न्यायालय ने भी प्रस्तावित परियोजना का सामाजिक प्रभाव आकलन करने के साथ इसपर आगे बढ़ने की अनुमति दी। इस परियोजना को राज्य में भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

माकपा ने यहां जारी बयान में कहा, ‘‘ हाल में तिरुवनंतपुरम में केंद्रीय मंत्री ने परियोजना के खिलाफ अभियान चलाया था जिसे सैद्धांतिक मंजूरी केंद्र ने दी है। यह विरोधाभास है कि केंद्रीय मंत्री उस विकास परियोजना का विरोध कर रहे हैं जिसकी अनुमति उच्चतम न्यायालय ने दी है।’’

उल्लेखनीय है कि मुरलीधरन ने शनिवार को केरल सरकार की महत्वकांक्षी परियोजना का विरोध किया था।

गौरतलब है कि केरल की विपक्षी पार्टियां सिल्वर लाइन परियोजना के लिए विभिन्न स्थानों पर सर्वे पत्थर लगाने का विरोध कर रही हैं। हालांकि, राज्य की वाम सरकार ने इसके बावजूद परियोजना पर आगे बढ़ने का फैसला किया है।

सिल्वरलाइन परियोजना के तहत राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम को कासरगोड से रेल गलियारे से जोड़ने का प्रस्ताव है और निर्माण पूरा होने पर इन दोनों स्थानों के बीच की दूरी तय करने में मौजूदा समय के मुकाबले चार घंटे कम समय लगेगा। यह 530 किलोमीटर लंबा रेल गलियारा होगा जिसके निर्माण पर 64 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस परियोजना का विकास केरल सरकार और रेलवे के संयुक्त उपक्रम के-रेल कर रहा है।

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