नयी दिल्ली, 17 अगस्त माकपा नेता बृंदा करात ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय में एक लंबित याचिका में हस्तक्षेप करने की मांग की, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मुसलमानों को मारने और उनके सामाजिक व आर्थिक बहिष्कार का आह्वान करने वाले “घोर घृणास्पद भाषण” हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों में रैलियों में दिए गए थे।
हरियाणा में हाल ही में सांप्रदायिक झड़पों में छह लोगों की जान चली गई थी।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता और राज्यसभा की पूर्व सदस्य करात ने शीर्ष अदालत से अनुमति मांगी है कि उन्हें इस मुद्दे पर पत्रकार शाहीन अब्दुल्ला द्वारा दायर लंबित याचिका में एक पक्ष के रूप में हस्तक्षेप करने की अनुमति दी जाए।
करात ने विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे धार्मिक संगठनों के नेताओं द्वारा कथित तौर पर दिल्ली में नांगलोई और घोंडा चौक सहित कुछ स्थानों पर सार्वजनिक सभाओं में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कथित रूप से लोगों को उकसाने वाले कुछ नफरत भरे भाषणों का उल्लेख किया है।
याचिका में कहा गया, “हाल ही में विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल आदि के नेताओं ने दिल्ली के विभिन्न स्थानों जैसे नांगलोई, घोंडा चौक आदि में आयोजित सार्वजनिक बैठकों में हिंदू धर्म के नाम पर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ लोगों को भड़काया है।”
इसमें कहा गया, हिंदुत्व के नाम पर लोगों को संवैधानिक मूल्यों और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ भड़काया गया।
याचिका में आरोप लगाया कि दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, पुलिस द्वारा ऐसे लोगों के खिलाफ न तो कड़ी कार्रवाई की जा रही है और न ही ऐसी बैठकों को रोका जा रहा है।
अब्दुल्ला की याचिका पर सुनवाई करते हुए 11 अगस्त को न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने कहा था कि समुदायों के बीच सद्भाव और सौहार्द होना चाहिए।
पीठ ने हाल में नूंह में सांप्रदायिक दंगों के मद्देनजर दर्ज मामलों की जांच के लिए हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) द्वारा एक समिति गठित करने का विचार रखा था।
उसने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से निर्देश लेने और 18 अगस्त तक प्रस्तावित समिति के बारे में सूचित करने को कहा था।
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