देश की खबरें | अनुच्छेद 370 पर न्यायालय का फैसला: मोदी ने बताया ‘ऐतिहासिक’, जम्मू-कश्मीर के दलों ने जताई निराशा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने संबंधी सरकार के फैसले को बरकरार रखने के उच्चतम न्यायालय के निर्णय को सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने ‘ऐतिहासिक’ करार देते हुए कहा कि इसने केंद्र के कदम की संवैधानिक वैधता की पुष्टि की है और “एकता के सार” को मजबूत किया है।
नयी दिल्ली, 11 दिसंबर पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने संबंधी सरकार के फैसले को बरकरार रखने के उच्चतम न्यायालय के निर्णय को सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने ‘ऐतिहासिक’ करार देते हुए कहा कि इसने केंद्र के कदम की संवैधानिक वैधता की पुष्टि की है और “एकता के सार” को मजबूत किया है।
उच्चतम न्यायालय के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के सरकार के फैसले को सर्वसम्मति से बरकरार रखते हुए सोमवार को कहा कि अगले साल 30 सितंबर तक विधानसभा चुनाव कराने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। न्यायालय ने यह भी कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किया जाए।
कांग्रेस ने कहा कि इस मुद्दे पर बहस खत्म हो गई है। पार्टी ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने और वहां विधानसभा चुनाव कराने की मांग की।
जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक दलों ने शीर्ष अदालत के फैसले पर निराशा व्यक्त की।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमख महबूबा मुफ्ती ने फैसले को न सिर्फ जम्मू कश्मीर के लोगों के लिए, बल्कि भारत के विचार के लिए भी “मौत की सजा” बताया। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने भी न्यायालय के निर्णय पर निराशा जताई लेकिन कहा कि संघर्ष जारी रहेगा।
माकपा नेता एम.वाई. तारिगामी ने फैसले को “परेशान करने वाला” बताया और कहा कि बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को 2019 में निरस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दोनों शीर्ष नेताओं ने कहा कि शीर्ष अदालत का फैसला सिर्फ एक कानूनी फैसला नहीं है, बल्कि एक “आशा की किरण” है और जम्मू-कश्मीर में शांति तथा सामान्य स्थिति लाने के अलावा एक मजबूत और अधिक एकजुट भारत के निर्माण के सामूहिक संकल्प का प्रमाण है।
मोदी ने शीर्ष अदालत के फैसले को ‘‘ऐतिहासिक’’ बताते हुए प्रशंसा की और कहा कि यह संवैधानिक रूप से पांच अगस्त, 2019 को संसद द्वारा लिए गए निर्णय को बरकरार रखता है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में हमारी बहनों और भाइयों के लिए आशा, प्रगति और एकता की एक शानदार घोषणा है। न्यायालय ने अपने गहन विवेक से एकता के उस सार को मजबूत किया है जिसे हम भारतीय होने के नाते सबसे ऊपर मानते हैं।’’
मोदी ने कहा, “जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनके सपनों को पूरा करने की उनकी सरकार की प्रतिबद्धता अटूट है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ हैं कि प्रगति का फल न केवल आप तक पहुंचे, बल्कि हमारे समाज के सबसे कमजोर और हाशिए वाले वर्गों तक भी उनका लाभ पहुंचे, जो अनुच्छेद 370 के कारण पीड़ित थे।”
उन्होंने ‘एक्स’ पर हैशटैग ‘नया जम्मू कश्मीर’ के साथ एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज का फैसला सिर्फ एक कानूनी फैसला नहीं है, यह उम्मीद की किरण है, उज्ज्वल भविष्य का वादा है और एक मजबूत, अधिक एकजुट भारत के निर्माण के हमारे सामूहिक संकल्प का प्रमाण है।’’
अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू-कश्मीर व लद्दाख - में विभाजित करने के लिए संसद में विधेयक पेश करने वाले गृह मंत्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पांच साल पहले एक दूरदर्शी निर्णय लिया जिससे जम्मू-कश्मीर में शांति और सामान्य स्थिति आई।
उन्होंने कहा, ‘‘आज उच्चतम न्यायालय के फैसले ने साबित कर दिया है कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का निर्णय पूरी तरह से संवैधानिक था।’’
उन्होंने ‘एक्स’ पर हैशटैग ‘नया जम्मूकश्मीर’ के साथ किए गए एक पोस्ट में कहा कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के निरस्त होने के बाद से जम्मू-कश्मीर में शांति और सामान्य स्थिति लौट आई है। प्रगति और विकास ने घाटी में मानव जीवन को नए अर्थ दिए हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन और कृषि क्षेत्रों में समृद्धि ने जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के निवासियों की आय के स्तर को बढ़ाया है।
शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त किए जाने के बाद गरीबों और वंचितों के अधिकार बहाल हुए हैं और अलगाववाद तथा पथराव अब अतीत की बातें हो गई हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 'भारत' के साथ जम्मू-कश्मीर की अखंडता मजबूत हुई है।
उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू, कश्मीर और लद्दाख हमेशा हमारे देश के थे और आगे भी रहेंगे।’’
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में स्थायी शांति स्थापित करने और क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, ‘‘चाहे वह नए प्रोत्साहनों के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना हो, अत्याधुनिक शैक्षिक बुनियादी ढांचे का निर्माण करना हो या कल्याणकारी योजनाओं के साथ गरीबों को सशक्त बनाना हो, हम इस क्षेत्र के लिए अपनी पूरी ताकत लगाना जारी रखेंगे।’’
उच्चतम न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज उच्चतम न्यायालय द्वारा, संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए को समाप्त करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्णय और उस पूरी प्रक्रिया को सही ठहराया गया है।’’
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय का यह ऐतिहासिक निर्णय हर भारतवासी को हर्षित करने वाला है। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त करके प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल एक नया अध्याय लिखा है बल्कि भारत की एकता और अखंडता को नयी मजबूती भी दी है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर को देश की ‘मुख्य विचारधारा’ में जोड़ने का ‘ऐतिहासिक’ काम किया गया है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने जम्मू-कश्मीर को देश की मुख्य विचारधारा में जोड़ने का ऐतिहासिक काम किया है, इसके लिए मैं और हमारे करोड़ों कार्यकर्ता प्रधानमंत्री का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से, जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में शांति, समृद्धि और विकास की एक नई सुबह देखी गई है।’’
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि शीर्ष अदालत का फैसला देश के सभी ‘राष्ट्रवादी लोगों’ के लिए जीत और जश्न का क्षण है, जिन्होंने ‘भारत के साथ जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण’ का सपना देखा था और जिसके लिए उन्होंने राजनीतिक और कानूनी लड़ाई लड़ी और यहां तक कि अपने जीवन का बलिदान भी दिया।
ठाकुर ने ‘एक्स’ पर कहा कि मोदी सरकार ने नेहरू युग के दौरान कांग्रेस द्वारा की गई कई ‘ऐतिहासिक भूलों’ में से एक को सुधारने के लिए पांच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किया।
कई भाजपा नेताओं ने भी न्यायालय के फैसले को "ऐतिहासिक" बताया और कहा कि जम्मू-कश्मीर को दिए गए विशेष दर्जे को खत्म करने के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने एक नया अध्याय लिखा है और भारत की एकता और अखंडता को नयी ताकत दी है।
उच्चतम न्यायालय का फैसला आने के बाद कांग्रेस ने कहा कि इस विषय पर बहस अब खत्म हो गई है, लेकिन केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल कर विधानसभा चुनाव कराना चाहिए।
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम और अभिषेक सिंघवी ने कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से संबंधित मामलों में न्यायालय के फैसले ने कई मुद्दों पर फैसला किया है लेकिन कुछ को छोड़ दिया है।
चिदंबरम ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘प्रथम दृष्टया, जिस तरीके से अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया, उससे संबंधित फैसले से हम सम्मानपूर्वक असहमत हैं।’’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की है और "हम इस संबंध में उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं"।
तारिगामी ने एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘फैसले से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों में निराशा है। फैसला बहुत परेशान करने वाला है क्योंकि....संविधान द्वारा गारंटी दी गई है।’’
माकपा नेता ने कहा कि बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
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