देश की खबरें | चुनावों के दौरान उपहार के वादों के खिलाफ जनहित याचिका पर सुनवाई पर विचार करेगा न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय बुधवार को उस जनहित याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के वास्ते विचार करने को राजी हो गया जिसमें मुफ्त उपहार देकर मतदाताओं को कथित तौर पर लुभाने के लिए राजनीतिक दलों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
नयी दिल्ली, दो मार्च उच्चतम न्यायालय बुधवार को उस जनहित याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के वास्ते विचार करने को राजी हो गया जिसमें मुफ्त उपहार देकर मतदाताओं को कथित तौर पर लुभाने के लिए राजनीतिक दलों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने वकील बरुण कुमार सिन्हा की उन दलीलों पर गौर किया कि इस मुद्दे पर हिंदू शिवसेना के उपाध्यक्ष सुरजीत सिंह यादव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करने की आवश्यकता है क्योंकि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म हो रहे हैं। पीठ ने कहा, ‘‘हम इसे सूचीबद्ध करेंगे।’’
यादव ने जनहित याचिका में कहा कि वह पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी द्वारा किए गए वादों और प्रस्तावों से व्यथित हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘किसी राजनीतिक दल, उसके नेताओं, चुनावों में उसके उम्मीदवारों द्वारा ऐसी पेशकश देना या वादे करना जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के अनुच्छेद 123 (1) (बी) के प्रावधानों के तहत भ्रष्ट गतिविधियों और घूसखोरी में लिप्त होने के तौर पर घोषित किया जा सकता है और ऐसे राजनीतिक दलों द्वारा खड़े किए गए प्रत्याशियों को उस राज्य में चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जा सकता है।’’
याचिका में निर्वाचन आयोग से अनुरोध किया गया है कि वह उम्मीदवारों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाएं, जिसमें नामांकन भरने के दौरान वे यह घोषणा करें कि उनकी पार्टियों ने जनता के पैसों से कोई मुफ्त उपहार देने का वादा नहीं किया है।
इसके साथ ही याचिका में केंद्र और निर्वाचन आयोग के अलावा कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बसपा और आम आदमी पार्टी को भी प्रतिवादी बनाने का अनुरोध किया गया है।
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