देश की खबरें | ट्रेन में घायल मिली महिला कांस्टेबल मामले पर अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया; केंद्र, आरपीएफ को नोटिस

प्रयागराज, चार सितंबर सरयू एक्सप्रेस ट्रेन में 29 अगस्त की रात एक महिला कांस्टेबल पर हमले के मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रितिंकर दिवाकर ने रविवार को अपने आवास पर सुनवाई कर इस मामले में केंद्र और आरपीएफ को नोटिस जारी करने का आदेश दिया।

मुख्य न्यायाधीश प्रितिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की पीठ ने सोमवार को दायित्वों का निर्वहन करने में विफल रहने के लिए आरपीएफ को फटकार लगाई और राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) को इस मामले में अपनी जांच की प्रगति रिपोर्ट 13 सितंबर को अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया।

इस संबंध में व्हाट्सऐप संदेश मिलने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने अपने आवास पर रविवार की रात आठ बजे इस मामले में सुनवाई की और स्वयं एवं न्यायमूर्ति श्रीवास्तव की एक पीठ गठित करने का निर्देश दिया।

जीआरपी ने पीठ को बताया कि महिला कांस्टेबल को खून से लथपथ स्थिति में 30 अगस्त को सरयू एक्सप्रेस के एक कंपार्टमेंट में पाया गया था और उसके चेहरे पर चोट लगी थी।

जीआरपी ने कहा कि महिला कांस्टेबल के भाई की लिखित शिकायत पर 30 अगस्त, 2023 को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।

सोमवार को सुनवाई के दौरान जीआरपी लखनऊ की पुलिस अधीक्षक पूजा यादव और उपाधीक्षक (जीआरपी) अदालत में मौजूद थे। पूजा यादव ने बताया कि सीआरपीसी की धारा 164 के तहत पीड़िता का बयान दर्ज नहीं किया जा सका है क्योंकि वह बयान देने की स्थिति में नहीं है।

उन्होंने यह भी बताया कि सुल्तानपुर में तैनात उत्तर प्रदेश पुलिस की महिला कांस्टेबल के साथ दुष्कर्म का कोई संकेत अभी तक नहीं मिला है। पीड़िता के केवल सिर और चेहरे पर घाव हैं।

हालांकि अदालत द्वारा यह पूछे जाने पर यह घटना कैसे घटी और घटना का समय क्या था, पुलिस अधीक्षक (जीआरपी) उचित जवाब नहीं दे सकीं। उन्होंने बताया कि संभवत: घटना अयोध्या और मनकापुर स्टेशन के बीच घटी होगी।

वहीं, सोमवार को अधिवक्ताओं द्वारा हापुड़ घटना को लेकर न्यायिक कार्य से विरत रहने के बीच सरकारी वकील अदालत की सुनवाई में शामिल हुए।

अदालत ने कहा, “वर्तमान घटना स्पष्ट रूप से भारतीय रेलवे अधिनियम के निश्चित प्रावधानों का सरासर उल्लंघन दर्शाती है। इसके अलावा, रेलवे सुरक्षा बल अपने दायित्वों का निर्वहन करने में पूरी तरह विफल रहा। मौजूदा घटना ना केवल महिलाओं बल्कि यह संपूर्ण समाज के खिलाफ एक अपराध है और यह महिलाओं के संपूर्ण मनोविज्ञान को बर्बाद करता है।”

अदालत ने आगे कहा, “इस मामले की गंभीरता को देखते हुए यह अदालत इस पत्र को जनहित याचिका के तौर पर दर्ज करने और रेल मंत्रालय, रेलवे बोर्ड के सचिव, रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक, राज्य सरकार और राज्य महिला आयोग को नोटिस जारी करने का निर्देश देती है।”

सुनवाई के दौरान, अदालत को बताया गया कि मीडिया में आयी खबरों के मुताबिक, कथित घटना 29 और 30 अगस्त की दरमियानी रात की है। इसका पता भोर में करीब चार बजे चला जब कुछ यात्री अयोध्या से सरयू एक्सप्रेस में चढ़े और उन्होंने एक महिला कांस्टेबल को खून से लथपथ, चलने-फिरने में असमर्थ अवस्था में देखा। उसके सिर और चेहरे पर कटने से घाव था।

इस बीच, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पीटीआई- को बताया, “प्रयागराज के सोरांव की रहने वाली 47 वर्षीय महिला हेड कांस्टेबल सुल्तानपुर में तैनात थी। हमलावरों के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा कि इस मामले में जांच चल रही है।”

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