देश की खबरें | ई-निगरानी पर सांख्यिकीय जानकारी के खुलासे से संबंधित याचिका पर अदालत ने केंद्र से जवाब मांगा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने सूचना के अधिकार कानून के तहत राज्य प्रायोजित इलेक्ट्रॉनिक निगरानी पर कुछ सांख्यिकीय सूचनाओं के खुलासे से संबंधित एक याचिका पर मंगलवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा।
नयी दिल्ली, 26 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने सूचना के अधिकार कानून के तहत राज्य प्रायोजित इलेक्ट्रॉनिक निगरानी पर कुछ सांख्यिकीय सूचनाओं के खुलासे से संबंधित एक याचिका पर मंगलवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा।
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को जवाब दायर करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया, जिसमें डेटा का प्रत्यक्ष खुलासा करने से इनकार किया गया था।
केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि टेलीग्राफ अधिनियम के तहत संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए अवरोधन के आग्रह को छह महीने के भीतर हटा दिया जाता है, जब तक कि किसी जांच के लिए इसकी आवश्यकता न हो। उन्होंने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
अदालत ने कहा, "प्रतिवादियों की ओर से पेश हुए श्री (अनुराग) अहलूवालिया ने निवदेन किया है कि रिट याचिका में उठाए गए सवालों को ध्यान में रखते हुए, प्रतिवादियों को गुण-दोष के आधार पर जवाब दाखिल करने की अनुमति दी जा सकती है। तदनुसार, जवाब छह सप्ताह की अवधि के भीतर दायर किया जाना चाहिए।"
याचिकाकर्ता अपार गुप्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह केवल इस बारे में सांख्यिकीय डेटा की मांग कर रहे हैं कि "कितनी बार" अवरोधन का सहारा लिया गया था।
गुप्ता ने दिसंबर 2018 में सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत छह आवेदन दायर कर एक निश्चित अवधि के दौरान इलेक्ट्रॉनिक निगरानी की अनुमति प्रदान करने वाली सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 के तहत पारित आदेशों की संख्या का विवरण मांगा था।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)