देश की खबरें | सरकारी धनराशि से धार्मिक शिक्षा देने के मामले पर अदालत ने मांगा सरकार से जवाब

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने बुधवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकारों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया कि सरकारी खर्च या सरकारी खजाने से दी जाने वाली धनराशि से धार्मिक शिक्षा कैसे दी जा सकती है और क्या यह संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन है।

लखनऊ, 17 मई इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने बुधवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकारों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया कि सरकारी खर्च या सरकारी खजाने से दी जाने वाली धनराशि से धार्मिक शिक्षा कैसे दी जा सकती है और क्या यह संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन है।

पीठ ने सरकार को पहले भी इसके लिए समय दिया था लेकिन जवाब दाखिल नहीं किया जा सका और राज्य एवं केंद्र सरकार के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 30 मई निर्धारित की है।

न्यायमूर्ति डी. के. सिंह की पीठ ने मदरसा शिक्षक एजाज अहमद की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया।

पीठ ने इसी साल 27 मार्च को याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की थी और राज्य और केंद्र से जवाब मांगा था।

धार्मिक शिक्षा प्रदान करने के लिए मदरसों को सरकारी खजाने से वित्त पोषित होने का संकेत देते हुए पीठ ने कहा था, " इसमें कोई शक नहीं है कि मदरसों में सामान्य पाठ्यक्रम के अलावा धार्मिक शिक्षा भी प्रदान की जाती है।"

पीठ ने आज सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की हस्तक्षेप याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें इस मुद्दे पर अदालत से अनुमति लेने की मांग की गई थी।

खंडपीठ ने कहा, "मामला व्यापक विस्तार और कुछ महत्व का है और इस मामले के नतीजे शिक्षा प्रणाली के साथ-साथ मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों के अधिकारों को भी प्रभावित करेंगे।"

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