मुंबई, नौ अगस्त बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार के उस आदेश को निरस्त कर दिया है जिसमें 65 वर्ष के ऊपर के टीवी और फिल्म कलाकारों को कोरोना वायरस संक्रमण के चलते लागू लॉकडाउन के दौरान काम करने की मनाही थी।
अदालत के इस फैसले पर वरिष्ठ अभिनेताओं ने राहत और खुशी प्रकट की है।
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अदालत ने राज्य सरकार की ओर से जारी दो परिपत्रों के प्रावधानों को “भेदभाव” करने वाला बताते हुए शुक्रवार को उन्हें निरस्त कर दिया।
न्यायमूर्ति एस. जे. काठवाला और न्यायमूर्ति आर. आई. चागला की पीठ ने कहा कि इस प्रकार का प्रतिबंध लगाना कलाकारों के उस मौलिक अधिकार का उल्लंघन है जो उन्हें अपने सम्मानजनक पेशे से आजीविका कमाने की स्वतंत्रता देता है।
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वरिष्ठ अभिनेताओं के लिए अभिनेता प्रमोद पांडेय ने कानूनी लड़ाई लड़ी और उनके सहयोगियों रजा मुराद, सुहासिनी मुलय और कंवलजीत सिंह समेत कई कलाकारों ने उन्हें इसके लिए बधाई दी।
अदालत ने दो याचिकाओं पर सुनवाई की जिनमें से एक 70 वर्षीय पांडेय द्वारा दायर की गई थी और दूसरी इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर एसोसिएशन ने दायर की थी।
पांडेय ने कहा कि कोरोना वायरस जनित परिस्थितियों से पहले उन्हें टीवी शो में दो-तीन दिन काम कर के तीस से पैंतीस हजार रुपये मिल जाते थे लेकिन लॉकडाउन शुरू होने से खर्च बढ़ गए और आमदनी बंद हो गई थी।
पांडेय ने ‘पीटीआई-’ से कहा, “हम शूटिंग शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। आखिरकार जब सरकार ने अनुमति दी तो 65 साल के ऊपर के अभिनेताओं, फिल्म उद्योग से जुड़े अन्य कर्मचारियों को स्वास्थ्य कारणों से काम करने की इजाजत नहीं दी। मुझे सरकार के फैसले पर आश्चर्य हुआ क्योंकि हम सभी को आजीविका कमाने का हक है।”
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