देश की खबरें | न्यायालय ने महमूदाबाद को अंतरिम जमानत दी, मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने को कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संबंध में सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार ‘अशोका यूनिवर्सिटी’ के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को बुधवार को अंतरिम जमानत दे दी, लेकिन उनके खिलाफ जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
नयी दिल्ली, 21 मई उच्चतम न्यायालय ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संबंध में सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार ‘अशोका यूनिवर्सिटी’ के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को बुधवार को अंतरिम जमानत दे दी, लेकिन उनके खिलाफ जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया कि वह मामले की जांच के लिए 24 घंटे के भीतर महानिरीक्षक (आईजी) रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में तीन-सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करें, जिसमें पुलिस अधीक्षक (एसपी) रैंक की एक महिला अधिकारी भी शामिल हो।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता को जांच में मदद के लिए अंतरिम जमानत दी गई है। शीर्ष अदालत ने महमूदाबाद को अपना पासपोर्ट जमा करने का निर्देश भी दिया।
पीठ ने कहा कि एसआईटी में सीधे भर्ती किए गए तीन आईपीएस अधिकारी शामिल होने चाहिए- जो हरियाणा के निवासी नहीं होंगे।
पीठ ने कहा कि आईजी रैंक के अधिकारी के अलावा दो अन्य पुलिस अधीक्षक या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी होने चाहिए।
सोनीपत स्थित अशोका यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर की ऑनलाइन पोस्ट की जांच-पड़ताल करने वाली पीठ ने उनके शब्दों के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि इनका इस्तेमाल जानबूझकर दूसरों को अपमानित करने या उन्हें असहज करने के लिए किया गया था।
न्यायमूर्ति कांत ने कहा, ‘‘शब्दों का चयन जानबूझकर दूसरों को अपमानित करने या असहज करने के लिए किया गया। प्रोफेसर एक विद्वान व्यक्ति हैं और उनके पास शब्दों की कमी नहीं हो सकती... वे दूसरों को ठेस पहुंचाए बिना उन्हीं भावनाओं को सरल में व्यक्त कर सकते थे। उन्हें दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए था। उन्हें सरल और तटस्थ का इस्तेमाल करना चाहिए था, दूसरों का सम्मान करना चाहिए था।’’
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