नयी दिल्ली, चार मई उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को दक्षिणी नगालैंड में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-2 के साथ माओ जनजाति के लोगों की आवाजाही की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उचित कदम उठाने के वास्ते केंद्र, नागालैंड और मणिपुर राज्यों को निर्देश देने की मांग वाली याचिका निस्तारित कर दी।
न्यायालय को बताया कि समस्या का समाधान कर लिया गया है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार के साथ बातचीत की थी और अब उनकी आवाजाही बाधित नहीं है।
पीठ में न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे.बी.पारदीवाला भी शामिल थे। मेहता ने पीठ को गृह मंत्रालय के निदेशक (पूर्वोत्तर प्रभाग) से प्राप्त निर्देशों के बारे में बताया।
पीठ ने कहा, “याचिकाकर्ता के वकील ने बताया है कि हालांकि इस स्तर पर इस अदालत के हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप इस मुद्दे को हल कर लिया गया है, यह एक दशक से अधिक समय से चल रहा था, जिसके परिणामस्वरूप ... जनजाति से संबंधित व्यक्तियों की आवाजाही को रोका जा रहा था।”
शीर्ष अदालत ने कहा, “चूंकि इस स्तर पर समस्या का समाधान हो गया है, इसलिए कार्यवाही को और लंबित रखना जरूरी नहीं है।”
याचिका का निस्तारण करते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता या किसी अन्य पीड़ित व्यक्ति को नगालैंड के मुख्य सचिव या गृह मंत्रालय के पूर्वोत्तर प्रभाग से संपर्क करने की स्वतंत्रता दी, ताकि किसी भी बार बार उठने वाले मुद्दे को हल करने के लिये उचित कदम उठाए जा सकें।
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