देश की खबरें | न्यायालय ने तमिलनाडु के मंत्री राजन के ऑडियो क्लिप की जांच संबंधी जनहित याचिका को खारिज किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें तमिलनाडु के मंत्री पलानीवेल त्यागराजन के ऑडियो क्लिप की जांच शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति से कराने का अनुरोध किया गया था।

नयी दिल्ली, सात अगस्त उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें तमिलनाडु के मंत्री पलानीवेल त्यागराजन के ऑडियो क्लिप की जांच शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति से कराने का अनुरोध किया गया था।

राजन ने उक्त ऑडियो क्लिप में कथित तौर पर मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के परिवार द्वारा प्राप्त संपत्ति को लेकर टिप्पणी की थी।

प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, ‘‘यह पूरी तरह से फर्जी याचिका है ...हम इसे (अदालत को) राजनीतिक मंच के तौर पर इस्तेमाल नहीं करने देंगे।’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि कार्रवाई योग्य कुछ सबूत होने चाहिए और संविधान के अनुच्छेद-32 (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) के तहत प्राप्त न्यायाधिकार क्षेत्र के दुरुपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती।

अदालत ने कहा, ‘‘कथित ऑडियो क्लिप है, जिसमें पूर्व वित्तमंत्री मुख्यमंत्री के परिवार का संदर्भ देते हैं। सबूत के लिहाज से इसका कोई महत्व नहीं है। यह अच्छी अफवाह है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘आपके पास फौजदारी कानून के तहत पर्याप्त विकल्प है। इसका उपयोग राजनीतिक मंच के तौर पर न करें।’’

याचिकाकर्ता प्रणेश राजामणिकम ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में सूचना प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल सेवा मंत्री त्यागराजन को कथित ऑडियो क्लिप की वजह से वित्त विभाग से हटाया गया।

पीठ ने कहा कि वह मंत्रियों के विभाग बदलने के राजनीतिक फैसलों पर नहीं जाएगी।

तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की कार्यप्रणाली की आलोचना करते मंत्री का ऑडियो सबसे पहले प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जारी किया था।

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