देश की खबरें | अदालत ने दिल्ली के पूर्व मंत्री के पौत्र को जबरन वसूली के मामले में बरी किया

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नयी दिल्ली, तीन नवंबर दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली सरकार में एक पूर्व उद्योग मंत्री के पौत्र को 15 साल पहले कथित तौर पर खुद को मंत्रालय का कर्मचारी बताकर जबरन वसूली करने के प्रयास के आरोप से बरी कर दिया है।

मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ऋषभ कपूर ने कहा कि अभियोजन पक्ष सभी उचित संदेहों से परे यह साबित करने में विफल रहा कि अमरपाल ने खुद को एक मंत्रालय का कर्मचारी बताया था और इस बहाने दो लोगों से पैसे वसूलने का प्रयास किया कि उनकी दुकान अनधिकृत हैं और उन्हें तोड़ा जा सकता है।

अदालत ने कहा कि वे दो व्यक्ति, जो शिकायतकर्ता भी थे, मामले में सबसे महत्वपूर्ण गवाह थे, लेकिन वे आरोपी की पहचान करने में विफल रहे।

एक अन्य गवाह, जिसने तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सहायक (पीए) होने का दावा किया था, की गवाही को ‘‘अविश्वसनीय’’ बताते हुए, न्यायाधीश ने कहा कि यह बचाव पक्ष की इस दलील को संभावित बनाता है कि आरोपी को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण मामले में फंसाया जा सकता है।

अदालत ने एक नवंबर के अपने आदेश में कहा, ‘‘आरोपी को धारा 385 (जबरन वसूली)/419 (प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी) के तहत अपराधों के लिए बरी किया जाता है।’’

अभियोजन पक्ष ने इस मामले में 16 गवाहों से जिरह की थी।

सुनवाई के दौरान, अमरपाल का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया था कि उनके मुवक्किल को ‘‘झूठा फंसाया गया था क्योंकि वह पूर्व उद्योग मंत्री दीप चंद बंधु के पौत्र हैं, और सत्तारूढ़ दल के साथ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण मामले में फंसाया गया था।

दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ अगस्त 2006 में मामला दर्ज किया था। मामले में फैसला आठ अक्टूबर 2021 को सुरक्षित रखा गया था।

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