नयी दिल्ली, 11 जुलाई दिल्ली में हालांकि सोमवार को बारिश हुई, लेकिन मौसम पूर्वानुमानकर्ताओं ने एक दिन पहले इसका अनुमान नहीं लगाया था।
कारण - वर्षा संवहनी बादलों से आई और इनके बनने के बारे में सटीक पूर्वानुमान व्यक्त करना मुश्किल होता है।
स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष (मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन) महेश पलावत ने कहा, "हम संवहनी बादलों के बनने की संभावना के बारे में जानते हैं - उच्च आर्द्रता और उच्च तापमान--लेकिन सटीक स्थान और तीव्रता के संदर्भ में सूक्ष्म पूर्वानुमान देना मुश्किल है। इसलिए किसी विशेष स्थान पर वर्षा के बारे में कोई भी कुछ निश्चित तौर पर नहीं कह सकता है।’’
संवहनी बादल संवहन द्वारा लंबवत रूप से विकसित होते हैं - गर्म हवा ऊपर उठती है और ठंडी होकर बादल बनाती है।
मौसम विज्ञानी ने कहा कि बारिश का लघु और तीव्र दौर देने के बाद ये बादल छंट जाते हैं।
गैर-संवहनी वर्षा की घटनाएं कम तीव्र होती हैं लेकिन लंबे समय तक चलती हैं और एक स्थिर वर्षा देती हैं।
पलावत ने कहा, हालांकि मानसून गैर-संवहनी वर्षा से जुड़ा हुआ है, ‘‘हम पिछले 10 वर्षों से मानसून अवधि में संवहनी घटनाक्रम देख रहे हैं या ऐसा जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहा है।’’
आम तौर पर मानसून से पहले की अवधि के दौरान संवहनी घटनाक्रम देखने को मिलता है।
उन्होंने कहा कि संवहनी बादलों के कारण उत्तर और पश्चिमी दिल्ली तथा पड़ोसी नोएडा के कुछ हिस्सों में सोमवार को बारिश हुई।
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