देश की खबरें | अपने क्षेत्र में खुद को छात्र समझकर सीखना ही कामयाबी की कुंजी है : कुंवर मानवेन्द्र सिंह

लखनऊ, 17 फरवरी उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने छात्र-छात्राओं को सीखने की आदत हमेशा बनाये रखने की नसीहत देते हुए सोमवार को कहा कि सदैव खुद को अपने क्षेत्र का विद्यार्थी समझकर निरंतर सीखना ही प्रगति की कुंजी है।

सिंह ने यहां ‘इंटीग्रल यूनिवर्सिटी’ के 16वें दीक्षांत समारोह में आज विभिन्न उपाधियां पाने वाले छात्र-छात्राओं से मुखातिब होते हुए उन्हें अपने ‘‘भाई और बहन’’ कहा।

उन्होंने कहा, ‘‘अब आप कहेंगे कि छात्र-छात्राओं को हमने भाइयों और बहनों क्यों कहा? सिर्फ इसलिये क्योंकि हमको भी समाजसेवा और राजनीति के क्षेत्र में काम करते हुए करीब 45 वर्ष हो गये हैं। राजनीति में बड़े पदों पर रहने का भी अवसर मिला है लेकिन उसके बाद भी हम अपने को आज भी इस क्षेत्र का विद्यार्थी मानते हैं।’’

सिंह ने कहा, ‘‘मेरी आप सभी से अपील है कि इस बात को हमेशा ध्यान में रखें कि अपने क्षेत्र में चाहे जितनी बुलंदी पर पहुंच जाएं लेकिन खुद को विद्यार्थी ही समझें। जब तक आपको लगेगा कि हम जिस क्षेत्र में काम कर रहे हैं उसके छात्र ही हैं, तब तक आपके पास आगे बढ़ने के रास्ते होंगे। जब आपको लगेगा कि हम तो मास्टर हो गये, तो फिर आपके पास आगे बढ़ने के रास्ते बंद हो जाएंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आप शिक्षा क्षेत्र के छात्र हैं और मैं समाजसेवा क्षेत्र का छात्र हूं तो उस लिहाज से हम भाई-बहन ही हुए।’’

सिंह ने शिक्षण संस्थान के पदाधिकारियों और छात्र-छात्राओं को बधाई भी दी।

उन्होंने विश्वविद्यालय से विभिन्न उपाधियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा, ‘‘भारत युवाओं का देश है। देश की युवा शक्ति होने के नाते आपका ज्ञान, कौशल एवं आपकी मेधा शक्ति देश के आर्थिक विकास की संवाहक बनेगी।’’

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि योजना आयोग के पूर्व सदस्य एवं हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अरुण मायरा ने देश के आर्थिक विकास में युवाओं की संवेदनशीलता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दूसरों को खुले जहन से सुनना किसी भी शिक्षण और क्षमता विकास कार्यक्रम की बुनियादी जरूरत है।

उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि वे और भी ज्यादा संवेदनशील बनें और समस्याओं को खुले जहन से सुनने, समझने और उनका हल निकालने की योग्यता पैदा करें।

उन्होंने कहा कि ऐसा होने से ही वे समाज के निर्माण में अपना योगदान दे सकेंगे।

मायरा ने कहा, ‘‘पर्याप्त रोजगार सृजन के बिना सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि होना दरअसल एक खोखली प्रगति है। वर्तमान में भारत की अर्थव्यवस्था में निचले तबके के लोगों की आमदनी में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। सरकार को आम लोगों की आय सुगमता और जीवन सुगमता सुनिश्चित करने पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिये।’’

इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के संस्थापक एवं कुलपति प्रोफेसर सैयद वसीम अख्तर ने छात्र-छात्राओं को आज मिली उपाधियों को समाज में योगदान करने की उनकी जिम्मेदारी करार देते हुए उम्मीद जतायी कि ये डिग्रियां हासिल करने वाले विद्यार्थी अपने देश के विकास के प्रति अपने दायित्व को पूरी संजीदगी से निभाएंगे।

इस अवसर पर 177 छात्र-छात्राओं को डॉक्टरेट की उपाधि दी गयी। इसके अलावा परास्नातक के 1,075 और स्नातक के 2,389 छात्र-छात्राओं को डिग्रियां वितरित की गयीं।

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