कांग्रेस का आरोप, बिहार सरकार प्रवासी मजदूरों को अपमानित कर रही

विधान परिषद सदस्य और अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) के मीडिया पैनल में शामिल प्रेम चंद्र मिश्रा ने आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव द्वारा एक दिन पहले सभी जिलाधिकारियों को लिखी चिट्ठी पर नाराजगी जताई। इसमें ‘‘मजदूर निष्क्रमण सहायता’’ देने के लिए विशेष दिशानिर्देश दिए गए हैं।

जमात

पटना, 16 मई कांग्रेस ने शनिवार को बिहार सरकार पर आरोप लगाया कि वह वित्तीय मदद को लेकर एक के बाद एक शर्तें लगाकर प्रवासी मजदूरों को अपमानित कर रही है जबकि इस महीने के शुरू में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विशेष रेलगाड़ियों से आने वाले मजदूरों से मदद करने का वादा किया था।

विधान परिषद सदस्य और अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) के मीडिया पैनल में शामिल प्रेम चंद्र मिश्रा ने आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव द्वारा एक दिन पहले सभी जिलाधिकारियों को लिखी चिट्ठी पर नाराजगी जताई। इसमें ‘‘मजदूर निष्क्रमण सहायता’’ देने के लिए विशेष दिशानिर्देश दिए गए हैं।

मिश्रा ने कहा, ‘‘ पत्र में कहा गया है कि एक हजार रुपये की सहायता प्राप्त करने के लिए राज्य में बैंक खाता होना चाहिए। क्या अधिकारियों को यह समझ नहीं आता कि दैनिक भेतनभोगी जो दूर राज्यों से आ रहे हैं उनके पास शायद ही यहां पर बैंक खाता होगा।’’

उन्होंने इस बात पर निराशा व्यक्त की कि पत्र से संकेत मिलता है कि सरकार सभी योग्य प्रवासी मजदूरों के खाते में सीधे एक हजार रुपये की राशि डालेगी।

मिश्रा ने कहा, ‘‘ यह प्रावधान मुख्यमंत्री के भरोसे के विपरीत है जिसमें उन्होंने सभी कामगारों को किराए की राशि के अतिरिक्त 500 रुपये की मदद देने का भरोसा दिया था। यह इस पूर्वानुमान पर आधारित था कि कोई भी वापसी यात्रा के लिए 500 से अधिक रुपये का भुगतान नहीं करेगा लेकिन उन मजदूरों का क्या जो 750 से 800 रुपये किराया देकर तमिलनाडु जैसे दूर राज्यों से आए हैं।’’

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि लगता है कि राज्य सरकार का इरादा प्रवासी मजदूरों की मदद नहीं करने का है और वह पैसे देने के लिए एक के बाद एक शर्तें लगाकर उनको अपमानित कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘ कुछ दिन पहले एक अधिकारी ने जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर पृथक-वास केंद्रों में खराब सुविधाओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे प्रवासियों की सहायता राशि रोकने की धमकी दे भयभीत करने को कहा था।’’

मिश्रा ने कहा कि धमकी वाला पत्र राज्य सरकार द्वारा पृथक-वास केंद्रों में कुप्रबंधन पर पर्दा डालने की एक और कोशिश है। उन्होंने उस प्रतिबंध को भी याद दिलाया जो इन स्थानों पर मीडिया कर्मियों के लिए लगाया गया।

मिश्रा ने कहा, ‘‘क्या सरकार मुश्किल में फंसे अपने निवासियों को छोटी सी मदद देकर यह महसूस कर रही है कि उसने बड़ा अहसान किया है? क्या नौकरशाहों के इस निंदनीय रवैये के सामने मुख्यमंत्री असहाय है ?

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