देश की खबरें | कांग्रेस ने भाजपा पर देश में व्यवस्थित तरीके से ध्रुवीकरण अभियान शुरू करने का आरोप लगाया
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नयी दिल्ली,10 सितंबर कांग्रेस ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हरियाणा और उत्तराखंड जैसे राज्यों में ‘व्यवस्थित तरीके से ध्रुवीकरण अभियान’ शुरू करने का आरोप लगाया और दावा किया कि इसने राष्ट्र के सामाजिक ताने-बाने को तार-तार कर दिया है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र पर निशाना साधने के लिए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में जी20 के नयी दिल्ली घोषणापत्र के एक पैराग्राफ का हवाला दिया, जिसमें इसने लोगों, धार्मिक प्रतीकों और धर्म ग्रंथों के खिलाफ धार्मिक आधार पर नफरत के सभी कृत्यों की कड़ी निंदा की है।
रमेश ने कहा,‘‘स्वयंभू विश्वगुरु के चौंका देने वाले पाखंड का एक और उदाहरण देखने को मिला है। वैश्विक स्तर पर, जी20 घोषणापत्र के पैराग्राफ 78 में वह धार्मिक एवं सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करने, और संवाद व सहिष्णुता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जबकि अपने देश भारत में, उन्होंने मणिपुर में जातीय हिंसा पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया और राज्य का दौरा तक नहीं किया।’’
रमेश ने कहा, ‘‘वह नफरती भाषण, भीड़ के हाथों हत्या, लक्षित हत्या, और धार्मिक स्थलों पर हमले पर चुप्पी साधे हुए हैं।’’
कांग्रेस नेता ने भाजपा पर प्रहार करते हुए कहा, ‘‘उनकी पार्टी ने हरियाणा और उत्तराखंड जैसे राज्यों में व्यवस्थित तरीके से ध्रुवीकरण अभियान शुरू किया है और देश के सामाजिक ताने-बाने को तार-तार कर दिया है।’’
भारत की अध्यक्षता में यहां हुए जी20 शिखर सम्मेलन में समूह के नेताओं ने शनिवार को नयी दिल्ली घोषणापत्र को अपनाया, जिसमें उन्होंने धर्म या आस्था की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण रूप से एकत्र होने के अधिकार पर जोर दिया।
घोषणापत्र में कहा गया, ‘‘हम संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव ए/आरईएस/77/318, विशेष रूप से धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता, संवाद और सहिष्णुता के प्रति सम्मान को बढ़ावा देने की इसकी प्रतिबद्धता पर ध्यान देते हैं। हम इस बात पर भी जोर देते हैं कि धर्म या आस्था की स्वतंत्रता, विचार या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण रूप से एकत्र होने का अधिकार और सहचर्य की स्वतंत्रता का अधिकार एक दूसरे पर आश्रित, अंतर-संबंधित और पारस्परिक रूप से मजबूत हैं...।’’
जी20 ने अपने संयुक्त घोषणापत्र में कहा, ‘‘इस संबंध में, हम धार्मिक प्रतीकों और धर्म ग्रंथों सहित देश के कानूनी ढांचे के प्रति पूर्वाग्रह के बिना व्यक्तियों के खिलाफ धार्मिक घृणा के सभी कृत्यों की कड़ी निंदा करते हैं।’’
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