जरुरी जानकारी | बिजली क्षेत्र में नौ साल में व्यापक सुधार, अबतक 16.93 लाख करोड़ रुपये का निवेश: आर के सिंह

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. केंद्रीय बिजली मंत्री आर के सिंह ने सोमवार को कहा कि सरकार ने पिछले नौ साल में बिजली क्षेत्र में व्यापक सुधार किये हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2014 से लेकर अबतक बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में करीब 16.93 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जबकि 17.05 लाख करोड़ रुपये के निवेश पर काम जारी है।

नयी दिल्ली, 15 जनवरी केंद्रीय बिजली मंत्री आर के सिंह ने सोमवार को कहा कि सरकार ने पिछले नौ साल में बिजली क्षेत्र में व्यापक सुधार किये हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2014 से लेकर अबतक बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में करीब 16.93 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जबकि 17.05 लाख करोड़ रुपये के निवेश पर काम जारी है।

उन्होंने यह भी कहा कि बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिये 80,000 मेगावाट क्षमता की तापीय बिजली परियोजनाएं निर्माण के विभिन्न स्तर पर हैं। वहीं नवीकरणीय ऊर्जा के मामले में करीब 99,000 मेगावाट की क्षमता निर्माणधीन है।

सिंह ने विद्युत (संशोधन) नियम, 2024 के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अबतक 16.93 लाख करोड़ रुपये निवेश किये गये हैं।

उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में किये गये निवेश का ब्योरा देते हुए कहा कि कुल 16.93 लाख करोड़ रुपये में से 11.2 लाख करोड़ रुपये बिजली उत्पादन, वितरण और पारेषण क्षेत्र में जबकि 5.73 लाख करोड़ रुपये नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश किये गये हैं।

मंत्री ने कहा कि साथ ही बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 17.05 लाख करोड़ रुपये का निवेश पाइपलाइन में है। इसमें से 7.4 लाख करोड़ रुपये बिजली क्षेत्र में जबकि 9.65 लाख करोड़ रुपये नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में लगाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि देश की बिजली उत्पादन क्षमता इस समय करीब 428 गीगावाट (एक गीगावाट बराबर 1,000 मेगावाट) है जो बढ़कर 800 गीगावाट हो जाएगी। देश ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखा है। हर साल 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की बोली की योजना है।

नये नियमों के बारे में मंत्री ने कहा कि जिन ग्राहकों के पास निर्दिष्ट मात्रा से अधिक क्षमता और ऊर्जा भंडारण प्रणाली है, उन्हें अब बिना लाइसेंस के अलग से ट्रांसमिशन लाइन स्थापित करने, संचालित करने और बनाए रखने की अनुमति होगी।

उन्हें ग्रिड से जुड़ने के लिए अलग से ट्रांसमिशन लाइन की स्थापना, संचालन या रखरखाव के लिए लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी।

ऐसी सुविधा की अनुमति देने से देश में थोक उपभोक्ताओं की एक नई श्रेणी उभरेगी। वे अधिक किफायती बिजली और भरोसेमंद ग्रिड से लाभान्वित होंगे।

मंत्री ने कहा कि उद्योग के लिए अलग से पारेषण लाइन को लेकर लाइसेंस की आवश्यकता को खत्म करने से उद्योग के लिए कारोबार करना सुगम होगा। इससे तेजी से औद्योगिक विकास होगा और अधिक संख्या में नौकरियां सृजित होंगी।

यह सुविधा बिजली उत्पादन कंपनियों और निजी उपयोग वाले बिजलीघरों के लिए पहले से ही उपलब्ध थी।

नये नियमों के तहत हरित हाइड्रोजन बनाने वाले उद्योगों के लिए कारोबार सुगमता को लेकर उपाय किये गये हैं। साथ ही ऊर्जा भंडारण क्षमता की तेजी से स्थापना करके ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा बदलाव को सुविधाजनक बनाने के भी उपाय किये गये हैं।

नये नियम थोक उपभोक्ताओं और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (25 मेगावाट से कम नहीं) को आसानी से और तेज गति से ग्रिड से जुड़ने की सुविधा प्रदान करते हैं।

सिंह ने कहा कि नये नियम के तहत खुली पहुंच व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया गया है कि दरें उचित हों। इससे उद्योग सहित उपभोक्ता प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली प्राप्त कर सकेंगे।

नये नियम का मकसद यह है कि प्राकृतिक आपदा जैसी असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर राजस्व अंतर पैदा न हो और यदि कोई अंतर है तो उसे समयबद्ध तरीके से समाप्त करना भी है।

नियम राजस्व अंतर को समाप्त कर लागत-आधारित शुल्क सुनिश्चित करके वितरण कंपनियों के वित्तीय स्थिति में भी सुधार करते हैं।

सिंह ने कहा कि बिजली क्षेत्र को वित्तीय रूप से व्यावहारिक बनाने के लिए यह आवश्यक है कि शुल्क दर लागत के अनुरूप हो और जो भी वाजिब लागत हो, उसकी अनुमति हो।

उल्लेखनीय है कि कुछ राज्यों के नियामकों ने एक बड़ा राजस्व अंतर पैदा कर दिया था। इससे बिजली खरीद लागत सहित विभिन्न वाजिब लागत की अनुमति न मिलने के कारण वितरण कंपनियों को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा।

इस तरह की गतिविधियों को हतोत्साहित करने के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी था कि लागत के स्तर पर ऐसा कोई अंतर न हो।

सिंह ने नियम जारी करते हुए कहा कि सरकार की तरफ से उठाये गये कदमों से वितरण कंपनियां व्यावहारिक बनी हैं और उनका घाटा 2014 के 27 प्रतिशत से कम होकर 2022-23 में 15.41 प्रतिशत पर आ गया है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\