देश की खबरें | सीएमएफआरआई ने यकृत रोग के लिए प्राकृतिक उपचार पद्धति विकसित की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. जीवनशैली से जुड़े विभिन्न रोगों के प्राकृतिक इलाज के लिए समुद्री जीवों पर अपने अनुसंधान को आगे बढ़ाते हुए केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) ने शराब के सेवन के बिना होने वाले यकृत रोग के उपचार के लिए समुद्री शैवाल से दवा तैयार की है।

कोच्चि, 27 सितंबर जीवनशैली से जुड़े विभिन्न रोगों के प्राकृतिक इलाज के लिए समुद्री जीवों पर अपने अनुसंधान को आगे बढ़ाते हुए केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) ने शराब के सेवन के बिना होने वाले यकृत रोग के उपचार के लिए समुद्री शैवाल से दवा तैयार की है।

एक आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, कैडलमिन टीएम लिवक्योर नामक यह औषधीय उत्पाद यकृत को दुरुस्त बनाने के लिए हरित प्रौद्योगिकी के माध्यम से समुद्री शैवाल से निकाले गये प्राकृतिक तत्व का शत प्रतिशत मिश्रण है।

इसमें कहा गया है कि यह सीएमएफआरआई द्वारा समुद्री जीवों से विकसित किया जा रहा इस तरह का नौवां उत्पाद है। सीएमएफआरआई इससे पहले टाइप-2 मधुमेह, गठिया, कॉलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप और अस्थि-भंगुरता आदि जीवनशैली से संबंधित रोगों की प्राकृतिक उपचार पद्धति विकसित कर चुका है।

संस्थान में मत्स्य पोषण और स्वास्थ्य विभाग में समुद्री जैव प्रौद्योगिकी की प्रधान वैज्ञानिक काजल चक्रवर्ती ने इस अनुसंधान कार्य की अगुवाई की।

उन्होंने कहा कि पूर्व-क्लीनिकल परीक्षण दिखाते हैं कि लिवक्योर उत्पाद ऐसे विभिन्न एंजाइम को रोक पाने में सफल रहे हैं जो शराब का सेवन नहीं करने पर भी यकृत का आकार बड़ा होने वाले रोग (एनएएफएलडी) के लिए जिम्मेदार डिस्लिपिडेमिया और पैथोफिजियोलॉजी से जुड़े होते हैं।

सीएमएफआरआई के निदेशक ए. गोपालकृष्णन ने कहा कि पिछले कुछ साल से संस्थान मानव स्वास्थ्य के सुधार के लिए लाभकारी प्राकृतिक उत्पाद विकसित करने के लिहाज से मुख्य रूप से समुद्री शैवालों पर आधारित अनुसंधान पर ध्यान दे रहा है।

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