नयी दिल्ली, 13 मई वरिष्ठ अधिवक्ता एवं ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन’ (एससीबीए) के अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने न्यायाधीश के तौर पर दो दशक लंबे कार्यकाल में भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना की न्याय के प्रति "अटूट" प्रतिबद्धता को मंगलवार को रेखांकित किया।
एससीबीए की ओर से आयोजित न्यायमूर्ति खन्ना के विदाई समारोह में सिब्बल ने कहा, ‘‘मैंने आपके समक्ष उच्च न्यायालय और इस न्यायालय में वकालत की है, लेकिन न्याय के प्रति आपकी प्रतिबद्धता 20 वर्षों में हमेशा अटूट रही है।’’
सिब्बल ने कहा कि निवर्तमान सीजेआई ने शीर्ष अदालत को सावधानी और असाधारण बुद्धिमत्ता के साथ आगे बढ़ाया।
उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति खन्ना ने संविधान के आदर्शों को मूर्त रूप देने के साथ-साथ न्याय की सर्वोच्च परंपराओं में सभी हितों को संतुलित करने का प्रयास किया।
सिब्बल ने कहा, ‘‘आपके निर्णयों ने धर्मनिरपेक्षता की अवधारणाओं को अपनाया है, अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की है, (जबकि) राज्य के हितों और नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों में संतुलन किया है। आप कानून का उल्लंघन करने वालों की जवाबदेही सुनिश्चित करने में निडर रहे हैं।"
सिब्बल ने कहा कि न्यायमूर्ति खन्ना निर्विवाद ईमानदारी के ‘‘मजबूत और स्वतंत्र न्यायाधीश’’ हैं।
उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति खन्ना उन विरल न्यायाधीशों में से हैं, जिन्होंने अदालत में निष्पक्षता की भावना को साकार किया।
न्यायाधीशों की भूमिका के बारे में वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, "मेरा मानना है कि यह देश चौराहे पर खड़ा है, जहां हमें ऐसे न्यायाधीशों की आवश्यकता है, जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करें, समानता के मुद्दे को आगे बढ़ाएं और राज्य की संरक्षा सुनिश्चित करें।"
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY