नयी दिल्ली, 23 जनवरी मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने सोमवार को भारत और विदेशों में चुनावों में ‘गहरे फर्जी विमर्श’ की प्रवृत्ति पर चिंता जताई और कहा कि इसके जरिए ‘विघटनकारी तत्व’ जनता की धारणा को बदलने और लोगों को गुमराह करने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया मंचों को अपने एल्गोरिद्म पावर (कलन विधि की शक्ति) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का इस्तेमाल कर ‘सक्रियता’ से फर्जी विमर्शों का पता लगाना चाहिए, खासकर भारत जैसे देश के अधिकार क्षेत्र में जहां चुनावी चक्र निश्चित और सुस्पष्ट है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने यहां चुनाव आयोग द्वारा ‘प्रौद्योगिकी का उपयोग और चुनाव निष्ठा’ विषय पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यह टिप्पणी की।
निर्वाचन आयोग की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, कुमार ने इस बात पर भी चिंता जताई कि मंचों के सर्च रिजल्ट्स में समान अवसर नहीं बनाए जा रहे हैं ताकि कम से कम आधिकारिक तौर पर सत्यापित संस्करणों को नकली सामग्री के समान प्रमुखता के साथ दिखाया जा सके।
उन्होंने कहा, ‘‘सीईसी ने प्रवर्तन एजेंसियों की तरह गहराई से फर्जी विमर्शों का पता लगाने की जिम्मेदारी सोशल मीडिया मंचों पर डालने का काम किया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह कल्पना करना मुश्किल है कि अगर प्रवर्तन एजेंसियां कहती हैं कि वे तब तक कार्रवाई नहीं करेंगे जब तक कि उन्हें अपराध की सूचना नहीं दी जाती है और खुफिया रोकथाम उनकी जिम्मेदारी नहीं है।
अपने संबोधन के दौरान कुमार ने कुछ प्रमुख सवाल भी उठाए, मसलन स्पष्ट और प्रणाली का पता लगाने योग्य नकली सामग्री की पहचान करना और उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अपलोड और प्रसारित होने से रोकना किसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन प्रौद्योगिकी को बदनाम करने की ‘प्रवृत्ति’ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ईवीएम हैकिंग के बारे में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति के हवाले से एक फर्जी खबर हर चुनाव से पहले सोशल मीडिया पर प्रसारित होती रहती है।
कृष्णमूर्ति ने हाल ही में अपने हवाले से प्रसारित की जा रही इस खबर का खंडन किया था।
यह दो दिवसीय सम्मेलन निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित किए जाने वाले तीन सम्मेलनों की श्रृंखला में दूसरा है। अंगोला, अर्जेंटीना, आर्मेनिया, ऑस्ट्रेलिया, चिली, क्रोएशिया, डोमिनिका, फिजी, जॉर्जिया, इंडोनेशिया, किरिबाती, मॉरीशस, नेपाल, पैराग्वे, पेरू, फिलीपींस और सूरीनाम सहित 17 देशों से लगभग 43 प्रतिभागियों तथा आईएफईएस, अंतरराष्ट्रीय आईडीईए जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन इस सम्मेलन में शामिल हैं।
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