देश की खबरें | दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते की मप्र के केएनपी में मौत, 42 दिन में तीसरे चीते की मौत

नयी दिल्ली/भोपाल, नौ मई दक्षिण अफ्रीका से मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में लायी गयी मादा चीता 'दक्षा' की मंगलवार को मौत हो गई। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने यह जानकारी दी।

'दक्षा' की मौत के साथ ही केएनपी में अब तक तीन चीतों की मौत हो चुकी है। इससे पहले एक मादा चीता और एक नर चीते की क्रमश: 27 मार्च और 13 अप्रैल को मौत हो गई थी।

अचानक हुई मौतों से संरक्षणवादी और वन्यजीव विशेषज्ञ कूनो राष्ट्रीय उद्यान की वहन क्षमता और चीतों को बाड़े में रखने के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता ‘दक्षा’ को निगरानी दल ने मंगलवार को पूर्वाह्न 10 बजकर 45 मिनट पर गंभीर रूप से घायल अवस्था में पाया। पशु चिकित्सकों ने मादा चीता ‘दक्षा’ का इलाज किया, लेकिन उसकी अपराह्न 12 बजे मौत हो गई।

बयान में कहा गया है कि मृत मादा चीता ‘दक्षा’ के शरीर पर पाए गए घाव समागम के प्रयास के दौरान नर चीते के हिंसक संपर्क के कारण प्रतीत होते हैं। ऐसे में निगरानी दल के दखल की संभावना न के बराबर है और व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है।

चीता परियोजना की समीक्षा 30 अप्रैल को विशेषज्ञों की एक टीम ने की थी। इसमें दक्षिण अफ्रीका के भी विशेषज्ञ शामिल थे।

इस बीच, मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) जे एस चौहान ने कहा, ‘‘ केएनपी की एक निगरानी टीम ने सुबह दक्षा को घायल अवस्था में पाया। उसे तुरंत आवश्यक दवा और उपचार दिया गया, लेकिन अपराह्न 12 बजे के आसपास उसकी मौत हो गई।’’

उन्होंने कहा कि दक्षा को बाड़ा नंबर एक में छोड़ा गया और दो नर चीतों, ‘वायु’ और ‘अग्नि’ को बाड़ा-7 में छोड़ा गया। बाद में बाड़ा-एक को बाड़ा-सात से जोड़ने वाले फाटक को एक मई को खोल दिया गया, ताकि चीते संबंध बनाकर अपना कुनबा बढ़ा सकें।

वन अधिकारी ने कहा कि 30 अप्रैल को कूनो में आयोजित एनटीसीए और भारतीय वन्यजीव संस्थान और दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों की एक बैठक के दौरान लिए गए निर्णय के अनुसार फाटक खोलने का यह कदम उठाया गया था।

चौहान ने कहा कि दोनों नर चीते (अग्नि और वायु) छह मई को बाड़े-7 में दाखिल हुए और ऐसा प्रतीत होता है कि संबंध बनाने के दौरान नर चीते हिंसक हो गए, जो सामान्य बात है। ऐसे समय में निगरानी दल के लिए दखल देना मुश्किल था।

इस साल 18 फरवरी को 12 चीते (जिनमें से सात नर और पांच मादा चीते शामिल हैं) को दक्षिण अफ्रीका से केएनपी लाया गया था।

इससे पहले भारत में चीतों को पुन: बसाने की योजना के तहत नामीबिया से आठ चीतों (पांच मादा और तीन नर) को यहां लाया गया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनको 17 सितंबर को बाड़ों में छोड़ा था।

दिमो संतोष

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