देश की खबरें | केन्द्र डाक्टरों के वेतन का समय से भुगतान सुश्निश्चित करे,पृथकवास की अवधि अवकाश नहीं माने: न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केन्द्र ने शुक्रवार को न्यायालय को सूचित किया कि कोविड-19 महामारी से निपटने में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों को समय से वेतन देने के निर्देशों पर दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब और त्रिपुरा ने अभी तक अमल नहीं किया है। इस पर न्यायालय ने कहा कि वह इन निर्देशों पर अमल कराने में इतनी बेबस नहीं हो सकता।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 31 जुलाई केन्द्र ने शुक्रवार को न्यायालय को सूचित किया कि कोविड-19 महामारी से निपटने में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों को समय से वेतन देने के निर्देशों पर दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब और त्रिपुरा ने अभी तक अमल नहीं किया है। इस पर न्यायालय ने कहा कि वह इन निर्देशों पर अमल कराने में इतनी बेबस नहीं हो सकता।

शीर्ष अदालत ने केन्द्र को यह स्पष्ट करने का भी निर्देश दिया कि स्वास्थ्य कर्मियों के पृथकवास की अवधि को उनका अवकाश नहीं माना जायेगा और इस अवधि के लिये उनके वेतन से कटौती नहीं की जायेगी।

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न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम.आर. शाह की पीठ ने केन्द्र से कहा कि वह स्वास्थ्य कर्मियों के वेतन का समय से भुगतान करने के लिये निर्देश जारी करे।

केंद्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता से पीठ ने कहा, ‘‘यदि राज्य केंद्र सरकार के निर्देशों और आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं तो आप भी बेबस नहीं हैं। आपको सुनिश्चित करना चाहिए कि आपके आदेश का क्रियान्वयन हो। आपदा प्रबंधन कानून के तहत आपके पास शक्ति है। आप कदम उठा सकते हैं।’’

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मेहता ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन के भुगतान के संबंध में शीर्ष अदालत के 17 जून के निर्देशों के बाद 18 जून को सभी राज्यों को इन स्वास्थ्यकर्मियों को समय से वेतन का भुगतान करने के लिये आवश्यक आदेश दिए गए थे। उन्होंने कहा कि कई राज्यों ने इन निर्देशों का पालन किया लेकिन महाराष्ट्र, पंजाब, त्रिपुरा और कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों ने चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को समय पर वेतन नहीं दिया।

मेहता ने कहा कि चिकित्सकों और दूसरे स्वास्थ्य कर्मियों के वेतन का समय से भुगतान सुनिश्चित करने के लिये केन्द्र सरकार उचित कदम उठायेगी।

उन्होंने पीठ से अनुरोध किया कि इस संबंध में उठाये गये कदमों से न्यायालय को अवगत कराने के लिये उन्हें एक सप्ताह का समय दिया जाये। पीठ ने उन्हें यह समय प्रदान कर दिया।

याचिकाकर्ता चिकित्सक डा आरूषि जैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के वी विश्वनाथन ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा उच्च जोखिम और निम्न जोखिम का वर्गीकरण करने का कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के 18 जून के आदेश के बाद इस संबंध में सरकार के परामर्श का कोई तर्कसंगत आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी भी स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन का भुगतान नहीं हुआ है।

पीठ निजी रूप से काम करने वाली चिकित्सक डॉ. आरूषि जैन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें केंद्र के 15 मई के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें कहा गया है कि चिकित्सकों के लिए 14 दिन का पृथक-वास अनिवार्य नहीं है।

शीर्ष अदालत ने यूनाइटेड रेसिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के आवेदन पर भी गौर किया जिसमें कहा गया है कि अनिवार्य पृथक-वास अवधि को अवकाश मानते हुए चिकित्सकों का वेतन काटा जा रहा है।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘याचिकाकर्ताओं के वकील द्वारा एक सबसे बड़ी दिक्कत यह बतायी गयी है कि जिन चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों का पृथकवास किया गया उनकी पृथकवास की अवधि को अवकाश माना गया है।’’

इस पर मेहता ने स्वीकार किया, ‘‘इस अवधि को अवकाश नहीं माना जा सकता।’’ उन्होंने कहा कि वह इस बारे में आवश्यक निर्देश लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन की समय अदायगी सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार कदम उठाएगी।

पीठ ने अपने आदेश में आगे कहा, ‘‘सालिसीटर जनरल तुषार मेहता का कहना है कि इस अवधि को अवकाश नहीं माना जा सकता और वह आवश्यक निर्देश प्राप्त करें। इस मामले को अब 10 अगस्त को सूचीबद्ध किया जाये।’’

अनूप

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