जरुरी जानकारी | निर्यात प्रोत्साहन बकाया जारी करने से नकदी राहत, शिपमेंट बढ़ाने में मिलेगी मदद: निर्यातक

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. सरकार द्वारा विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के तहत लंबित 56,027 करोड़ रुपये का कर रिफंड जारी करने की घोषणा का निर्यातकों ने स्वागत किया और कहा कि इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और नकदी की कमी से निपटने में मदद मिलेगी।

नयी दिल्ली, 10 सितंबर सरकार द्वारा विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के तहत लंबित 56,027 करोड़ रुपये का कर रिफंड जारी करने की घोषणा का निर्यातकों ने स्वागत किया और कहा कि इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और नकदी की कमी से निपटने में मदद मिलेगी।

भारतीय प्लास्टिक निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष अरविंद गोयनका ने कहा कि पिछले दो वर्षों के एमईआईएस (भारत से माल निर्यात योजना) प्रोत्साहन को जारी करने से निर्यातकों को बड़ी मदद मिलेगी। उम्मीद है कि इसके तहत प्लास्टिक के उत्पाद निर्यात करने वालों को 2,000 करोड़ रुपये से अधिक जारी किए जाएंगे।

गोयनका ने उम्मीद जताई कि इस घोषणा के तहत एफआईबीसी (लचीला मध्यवर्ती थोक कंटेनर) बैग को भी शामिल किया जाएगा।

वाणिज्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा था कि सरकार विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के तहत लंबित 56,027 करोड़ रुपये का कर रिफंड 45,000 से अधिक निर्यातकों को वितरित करेगी।

विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के तहत जारी किया जा रहे 56,027 करोड़ रुपये, निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और कर छूट योजना (आरओडीटीईपी) के तहत 12,454 करोड़ रुपये और राज्य-केंद्रीय लेवी और करों (आरओएससीटीएल) योजना के तहत 6,946 करोड़ रुपये की छूट की घोषणा से अलग है।

भारतीय निर्यात संगठन संघ (फियो) के उपाध्यक्ष खालिद खान ने कहा कि यह एक बहुप्रतीक्षित कदम था, क्योंकि निर्यातकों को नकदी की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने सरकार से निर्यातकों को जरूरी मदद देने के निर्णय को समय से लागू करने का आग्रह किया।

टोटल ग्रुप के चेयरमैन विजय गुप्ता ने कहा कि इस कदम से निर्यातकों का मनोबल बढ़ेगा, जो अत्यधिक समुद्री माल ढुलाई के कारण पीड़ित हैं।

इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए रत्न और आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के अध्यक्ष कॉलिन शाह ने कहा कि यह उन निर्यातकों के लिए एक बड़ी राहत होगी, जो पड़ोसी देशों के साथ प्रतिस्पर्धात्मक रूप से कीमत तय करने में असमर्थ थे।

चमड़ा निर्यात परिषद (सीएलई) के अध्यक्ष संजय लीखा ने कहा कि सभी सदस्य इसकी मांग कर रहे थे और इससे चमड़ा और जूते निर्यात क्षेत्र को बड़ी मदद मिलेगी।

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