देश की खबरें | राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामलों की त्वरित सुनवाई की जरूरत है: उच्चतम न्यायालय

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नयी दिल्ली, छह जुलाई उच्चतम न्यायालय ने 1996 में राष्ट्रीय राजधानी के लाजपत नगर में हुए बम विस्फोट मामले की सुनवाई में देरी पर चिंता व्यक्त करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामलों की शीघ्र सुनवाई होना समय की मांग है।

न्यायालय ने कहा कि मामले की सुनवाई में देरी से ‘राष्ट्रीय हित’ से समझौता किया गया।

इक्कीस मई, 1996 की शाम को हुए इस विस्फोट में 13 लोगों की मौत हुई थी और लगभग 38 लोग घायल हुए थे।

उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में चार दोषियों- मोहम्मद नौशाद, मिर्जा निसार हुसैन, मोहम्मद अली भट और जावेद अहमद खान को कोई राहत दिए बगैर जीवनपर्यंत कारावास की सजा सुनायी और कहा कि उन्होंने विस्फोट करके भारत को ‘‘अस्थिर करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश’’ को अंजाम दिया था।

न्यायालय ने अपने 190 पृष्ठ के फैसले में कहा, ‘‘देरी, चाहे किसी भी कारण से हो, चाहे प्रभारी न्यायाधीश या अभियोजन पक्ष के कारण हो, निश्चित रूप से राष्ट्रीय हित से समझौता किया गया है। ऐसे मामलों की शीघ्र सुनवाई समय की जरूरत है, खासकर तब, जब यह राष्ट्रीय सुरक्षा और आम आदमी से संबंधित हो। अफसोस की बात है कि जांच के साथ-साथ न्यायिक अधिकारियों द्वारा भी पर्याप्त सतर्कता नहीं दिखाई गई।’’

न्यायमूर्ति बी. आर. गवई, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ कहा, ‘‘राष्ट्रीय राजधानी के मध्य में एक प्रमुख बाजार पर हमला किया गया और हम ऐसा कह सकते हैं कि इस मामले से आवश्यक तत्परता और ध्यान से नहीं निपटा गया है।’’

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि वे आरोपी व्यक्ति, जिन्होंने मुकदमे का सामना नहीं किया है या जिनके खिलाफ राज्य ने अपील नहीं की है, प्रथमदृष्टया इस साजिश का हिस्सा प्रतीत होते हैं।

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