ताजा खबरें | बजट केवल देश की एक प्रतिशत आबादी के लिए : चिदंबरम
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में आम बजट को ‘‘निराशाजनक’’ करार देते हुए कहा कि ‘‘अमीरों का, अमीरों के लिए और अमीरों द्वारा ’’ बनाया यह बजट देश की उस एक प्रतिशत आबादी के लिहाज से लाया गया है जिसके नियंत्रण में देश की 73 प्रतिशत संपदा है।
नयी दिल्ली, 11 फरवरी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में आम बजट को ‘‘निराशाजनक’’ करार देते हुए कहा कि ‘‘अमीरों का, अमीरों के लिए और अमीरों द्वारा ’’ बनाया यह बजट देश की उस एक प्रतिशत आबादी के लिहाज से लाया गया है जिसके नियंत्रण में देश की 73 प्रतिशत संपदा है।
उन्होंने उच्च सदन में आम बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए दावा किया कि 2021-22 का बजट विफल रहा है क्योंकि गरीब को नकदी अंतरण के तहत छोटी राशि भी नहीं दी गयी तथा राशन प्रदान करने की सुविधा को भी जारी नहीं रखा गया।
चिदंबरम ने कहा, ‘‘अंतर्निहित बात है कि यह बजट अमीरों का, अमीरों के लिए और अमीरों द्वारा बनाया गया है...भारत के गरीब लोगों के लिए इसमें कुछ भी नहीं है जो समस्याएं झेल रहे हैं..यह बजट उन एक प्रतिशत लोगों के लिए है जिनके नियंत्रण में भारत की 73 प्रतिशत संपदा है।’’
उन्होंने कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था को निरंतर नकारती रही है और मानती है कि अर्थव्यवस्था की समस्या ढांचागत नहीं वरन चक्रीय है।
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘विश्व के प्रत्येक अर्थशास्त्री ने कहा कि हमें मांग पैदा करनी होगी तथा मांग पैदा करने का श्रेष्ठ तरीका है कि लोगों के हाथों में पैसा दिया जाए। यह सरकार इसे लेकर विफल रही है। मैं अपना आरोप दोहरा रहा हूं। आप पिछले 36 माह के दौरान मिले सबक अभी तक नहीं सीख पाए हैं। मुझे भय है कि आपके द्वारा सबक नहीं सीखे जाने के कारण 12 महीने और व्यर्थ हो जाएंगे तथा गरीब परेशानी झेलेगा और बुरी तरह झेलेगा।’’
उन्होंने कहा कि 2004-05 में स्थिर मूल्यों पर जीडीपी करीब 32.42 लाख करोड़ रूपये थी जो संप्रग सरकार के सत्ता से हटने के समय तीन गुना से अधिक बढ़कर 105 लाख करोड़ रूपये हो गयी।
चिदंबरम ने कहा, ‘‘उसके बाद से क्या हुआ? 2017-18 में यह 131 लाख करोड़ रूपये थी। 2018-19 में यह 139 लाख करोड़ रूपये पर पहुंच गयी। 2019-20 में यह थोड़ा और बढ़कर 145 लाख करोड़ रूपये हो गयी। 2020-21 में, जो वर्ष समाप्त होने वाला है, पहली छमाही के दौरान यह 60 लाख करोड़ रूपये के करीब रही तथा वर्षांत तक यह करीब 130 लाख करोड़ रूपये पहुंचेगी। इसका मतलब है कि हम वापस वहीं आ गये जहां हम 2017-18 में थे।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने तीन साल में ‘‘अकुशल आर्थिक कुप्रबंधन’’ किया है।
चिदंबरम ने कहा, ‘‘माननीय वित्त मंत्री को मेरे द्वारा अकुशल शब्द का प्रयोग करने पर आपत्ति हुई। मैं संसद में कठोर शब्द का उपयोग नहीं कर सकता। मेरे पास जो उपलब्ध है, उसमें मैं सबसे मृदु शब्द का उपयोग कर रहा हूं। अकुशल आर्थिक कुप्रबंधन के तीन वर्षों के कारण का अर्थ है कि 2020-21 में हम ठीक वहीं पहुंच गये जहां हम 2017-18 में थे।’’
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