ताजा खबरें | बजट चर्चा चार अंतिम रास

उन्होंने कहा कि विभिन्न दलों के सदस्यों ने प्रधानमंत्री को हस्ताक्षर कर ज्ञापन सौंपा है जिसमें उनसे एमपीलैड की राशि रोके जाने के उनके फैसले पर पुन:विचार करने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने कहा ‘‘चुनाव चाहे लोकसभा के हों, विधानसभा के हों या स्थानीय निकाय चुनाव हों, लोग पूछते हैं कि आपने क्या किया? स्थानीय स्तर पर विकास के लिए यह राशि जरूरी है।’’

गौरतलब है कि सरकार ने 2020-21 और 2021-22 के दौरान एमपीलैड को निलंबित कर दिया था और कहा था कि इस धन का इस्तेमाल देश में कोविड-19 महामारी के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन के लिए किया जाएगा।

बीजद के सुजीत कुमार ने ओडिशा का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य को अक्सर प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है, इसलिए उसे विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य के लिए आवंटन बढ़ाने की मांग भी की।

द्रमुक सदस्य टी के एस इलानगोवन ने कहा कि सोलर पैनल, सोलर इन्वर्टर पर उत्पाद शुल्क और कर बढ़ा दिया है। इससे 2022 तक 1020 गीगाबाइट सौर ऊर्जा का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता ।

उन्होंने अस्पतालों के अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए नीति बनाए जाने की मांग भी की।

माकपा की झरना दास वैद्य ने बजट को कारपोरेट जगत का बजट बताते हुए कहा कि इसमें गरीबों को कुछ नहीं दिया गया है।

शिवसेना के अनिल देसाई ने कहा ‘‘लोकलुभावना बजट, नए तरीके से, डिजिटल तरीके से पेश किया गया लेकिन इसने निराश किया है।’’

उन्होंने कहा ‘‘महाराष्ट्र कोविड-19 से सर्वाधिक बुरी तरह प्रभावित किया। लेकिन राज्य को इसके मद्देनजर इस बजट से कुछ खास नहीं मिला। कोविड-19 का टीका लोगों को मुफ्त में दिया जाना चाहिए।’’

चर्चा में शिरोमणि अकाली दल के नरेश गुजराल, तेदेपा के कनकमेदला रविंद्र कुमार और कांग्रेस सदस्य के सी वेणुगोपाल ने भी हिस्सा लिया।

चर्चा अधूरी रही।

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