देश की खबरें | ब्रांड और सोशल मीडिया ने तय कर दिए समाज में सुंदरता के अवास्तविक मानक

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. लड़कियों के चेहरे और पैरों पर बाल होना, लड़कों के दाढ़ी नहीं होना जैसे तमाम मानक इस समाज में बना दिए गए हैं जिनकी वजह से युवाओं को अपमानित किया जाता रहा है और उन्हें शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। इन अवास्तविक मानकों को गढ़ने में विभिन्न ब्रांड, विज्ञापनों तथा सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका है, लेकिन कुछ युवा इन धारणाओं को तोड़कर आत्मविश्वास से अपना जीवन जीते हैं।

नयी दिल्ली, 18 जून लड़कियों के चेहरे और पैरों पर बाल होना, लड़कों के दाढ़ी नहीं होना जैसे तमाम मानक इस समाज में बना दिए गए हैं जिनकी वजह से युवाओं को अपमानित किया जाता रहा है और उन्हें शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। इन अवास्तविक मानकों को गढ़ने में विभिन्न ब्रांड, विज्ञापनों तथा सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका है, लेकिन कुछ युवा इन धारणाओं को तोड़कर आत्मविश्वास से अपना जीवन जीते हैं।

तान्या रतूड़ी अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए बताती हैं कि किस तरह उन्हें बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई थी, जब एक दोस्त ने उनके पैरों के बालों की ओर इशारा किया और बताया कि लोग पीठ पीछे इस पर किस तरह उनका मजाक उड़ाते हैं।

उस घटना के लगभग 18 साल बाद अब रतूड़ी एक लैंगिक अधिकार कार्यकर्ता के रूप में काम करती हैं।

हालांकि उनके सामने उनकी किशोरावस्था में अजीबोगरीब, अलग-थलग करने वाली और अपमानजनक भावना का वह मिला-जुला रूप हाल में फिर सामने आ गया, जब एक छात्रा को उसके चेहरे के बालों के लिए ट्रोल किया गया।

इन उदाहरणों से पता चलता है कि समाज में बाहरी सुंदरता के गढ़े हुए ऐसे मानकों को मानने के लिए मजबूर महिलाओं पर कितनी अवास्तविक मांगें थोपी जाती हैं।

उत्तर प्रदेश बोर्ड की दसवीं कक्षा की परीक्षा में पूरे प्रदेश में अव्वल रहने वाली प्राची निगम के लिए जो गर्व का क्षण होना चाहिए था, वह तब एक दुःस्वप्न बन गया, जब वह क्रूरतापूर्ण तरीके से ‘बॉडी शेमिंग’ का शिकार हो गईं।

व्यक्तिगत हमलों के बाद प्राची ने बीबीसी न्यूज हिंदी के को दिए एक साक्षात्कार के दौरान कहा, ‘‘परीक्षा में कुछ कम अंक आ जाते तो बेहतर होता, इस तरह की ट्रोलिंग तो नहीं होती।’’

प्राची निगम उप्र बोर्ड की 10वीं कक्षा की परीक्षा में 98.50 प्रतिशत अंकों के साथ शीर्ष पर रही थीं।

तब बॉम्बे शेविंग कंपनी ने प्रमुख अंग्रेजी अखबारों में पहले पन्ने पर एक विज्ञापन दिया जिसमें लिखा था - ‘‘प्रिय प्राची, वे आज आपके बालों का मजाक उड़ा रहे हैं, कल वे आपकी एआईआर (ऑल इंडिया रैंकिंग) की तारीफ करेंगे।’’

इसके साथ टैगलाइन थी, ‘‘हमें उम्मीद है कि आपको कभी हमारा रेजर इस्तेमाल करने के लिए परेशान नहीं किया जाएगा।’’

बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के मनोचिकित्सक श्वेतांक बंसल के अनुसार, ब्रांड हर चीज के लिए मानक बनाने के व्यवसाय में हैं और इस तरह के संदेश ‘बाहरी पहचान’ को लेकर सभी युवाओं को प्रभावित करते हैं, न कि केवल महिलाओं को।

बंसल ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘आंतरिक पहचान का मतलब है कि मैं वही हूं जो मैं सोचता हूं या सोचती हूं। और बाहरी पहचान का मतलब है कि मैं वही हूं जो आप मेरे बारे में सोचते हैं। आजकल युवाओं में, बाहरी पहचान बहुत मजबूत होती है और उनका आत्म-सम्मान पूरी तरह से दूसरों से मिलने वाली प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है।’’

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