उल्लेखनीय है कि ट्रंप प्रशासन ने गोपनीय सूचनाओं का खुलासा हो जाने की आशंका को लेकर ‘द रूम वेयर इट हैपेन्ड’’ पुस्तक के विमोचन को रोकने की कोशिशें की थी।
अमेरिकी जिला न्यायाधीश रॉयस लाम्बर्थ का यह फैसला एक ऐसे अदालती मामले में बोल्टन की जीत है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं शामिल हैं।
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हालांकि, न्यायाधीश ने यह स्पष्ट कर दिया कि बोल्टन ने व्हाइट हाउस की औपचारिक मंजूरी के बिना खुद से अपना संस्मरण प्रकाशित करने का कदम उठाकर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया। जबकि व्हाइट हाउस ने कहा है कि वह गोपनीय सूचनाओं को लेकर अब भी इसकी पड़ताल कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा,‘‘ सरकार यह साबित करने में नाकाम रही कि इस पर रोक से अपूरणीय क्षति रोकी जा सकती है। ’’
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तात्किल परिप्रेक्ष्य में देखें तो यह प्रदर्शित होता कि इस फैसले ने चुनावी वर्ष में इस पुस्तक के पढ़े जाने और इसे बांटे जाने का दायरा बढ़ा दिया है।
इस पुस्तक में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति का जिक्र है, जब बोल्टन व्हाइट हाउस में सेवा दे रहे थे।
न्यायाधीश का फैसला आने के शीघ्र बाद ट्रंप ने ट्वीट किया, ‘‘बोल्टन ने गोपनीय सूचना (बड़े पैमाने पर) जारी कर कानून तोड़ा है। ’’
ट्रंप ने कहा कि बोल्टन को इसकी बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। यह दोबारा कभी नहीं होना चाहिए।
न्याय विभाग ने पुस्तक के विमोचन को रोकने के लिये पिछले हफ्ते मुकदमा दायर किया था और पुस्तक की प्रतियां भी विक्रेताओं से वापस मंगाने की मांग की थी।
लेम्बर्थ ने कहा कि इस पुस्तक की दो लाख प्रतियां देश भर में पुस्तक विक्रेताओं के पास पहुंच चुकी है, इसके विमोचन को रोकना निरर्थक होगा।
बड़े मीडिया संस्थानों को भी यह पुस्तक मिल चुकी है और उन्होंने इस बारे में व्यापक सामग्री छापी हैं।
एपी
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