देश की खबरें | कर्नाटक में सत्ता विरोधी लहर को पार कर फिर से वापसी के लिए भाजपा को मोदी के करिश्मे पर भरोसा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कर्नाटक विधानसभा चुनाव के तहत बुधवार को होने वाले मतदान से पहले सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने करीब महीने भर चले प्रचार अभियान के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रखा और उनके करिश्मे की बदौलत सत्ता विरोधी लहर को पाटने और ‘डबल इंजन’ सरकार के अपने अभियान को मजबूत करने की हर कवायद की। हालांकि, इसका परिणाम तो 13 मई को सामने आएगा जब मतों की गिनती होगी।
बेंगलुरु, नौ मई कर्नाटक विधानसभा चुनाव के तहत बुधवार को होने वाले मतदान से पहले सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने करीब महीने भर चले प्रचार अभियान के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रखा और उनके करिश्मे की बदौलत सत्ता विरोधी लहर को पाटने और ‘डबल इंजन’ सरकार के अपने अभियान को मजबूत करने की हर कवायद की। हालांकि, इसका परिणाम तो 13 मई को सामने आएगा जब मतों की गिनती होगी।
दक्षिण भारत में कर्नाटक ही एकमात्र राज्य है जहां भाजपा सत्ता में है। पार्टी के लिए यहां की सत्ता बरकरार रखना और अपनी जीत की लय को बनाए रखना इस साल के अंत में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के हिंदी पट्टी के राज्यों में होने वाले चुनावों के मद्देनजर महत्वपूर्ण होगा।
चुनावों से कुछ महीने पहले, कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के कथित भ्रष्टाचार को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया था। उसने बसवराज बोम्मई के नेतृत्व वाली सरकार पर 40 प्रतिशत कमीशन वाली सरकार का आरोप लगाया। इसकी काट के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस बयान को हथियार बनाकर कांग्रेस सरकारों पर 85 प्रतिशत वाली कमीशन सरकार होने का पलटवार किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि दिल्ली से एक रुपया निकलता है तो लोगों तक पहुंचते-पहुंचते वह 15 पैसे रह जाता है।
भाजपा राज्य में 2018 में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी लेकिन बहुमत से दूर रह गई थी। इसके बाद जनता दल (सेक्युलर) और कांग्रेस ने हाथ मिलाया और एच डी कुमारस्वामी राज्य के मुख्यमंत्री बने।
यह सरकार लंबे समय तक नहीं टिक सकी। भाजपा ने जुलाई 2019 में कांग्रेस और जद (एस) के 17 विधायकों की मदद से सरकार बनाई। इन विधायकों ने इस्तीफा दे दिया और भाजपा के साथ हाथ मिला लिया।
भाजपा के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कर्नाटक में अपने चुनावी अभियान के दौरान 19 जनसभाओं को संबोधित किया और छह रोड शो किए।
भाजपा ने केंद्र से अपने सभी शीर्ष नेताओं - अमित शाह, जेपी नड्डा, राजनाथ और निर्मला सीतारमण, और योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश) सहित कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को चुनाव प्रचार के लिए उतारा।
पार्टी ने 75 नए उम्मीदवारों को मैदान में उतारा और अपने चुनावी घोषणापत्र में समान नागरिक संहिता और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) लागू करने का वादा किया और प्रचार के दौरान ‘डबल इंजन’ सरकार के फायदों को रेखांकित किया।
कांग्रेस द्वारा सत्ता में आने पर बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने के वादे को भाजपा ने भगवान ‘हनुमान’ के अपमान से जोड़ा और इसे चुनावी मुद्दा बनाने की भरपूर कोशिश की।
मोदी ने प्रस्तावित प्रतिबंध की तुलना हनुमान को ही बंद करने से की।
उन्होंने कांग्रेस द्वारा अपना घोषणापत्र जारी करने के बाद अपने सभी भाषणों में ‘जय बजरंग बली’ का नारा लगाया।
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