2 जनवरी की बड़ी खबरें और अपडेट्स
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भारत और दुनिया की अहम खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.- ईरान में सत्ता विरोधी प्रदर्शन तेज, सात लोगों की मौत की खबर
- न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने उमर खालिद के लिए लिखा पत्र
- अफगानिस्तान में भारी बारिश के बाद अचानक आई बाढ़, 17 लोगों की मौत
- जर्मनी में गैर-कानूनी तरीके से दाखिल होने वाले लोगों की संख्या घटी
- राहुल गांधी बोले, "इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा और प्रशासन नींद में रहा"
सिर्फ भारत ही नहीं, जर्मनी भी चाहता है यूएन सुरक्षा परिषद में "बड़े पैमाने पर सुधार"
जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में बार-बार आने वाले गतिरोधों का हवाला देते हुए, संयुक्त राष्ट्र की सबसे ताकतवर संस्था में "बड़े पैमाने पर सुधार" की मांग की है. जर्मन न्यूज एजेंसी डीपीए से बातचीत में वाडेफुल ने कहा, "सुरक्षा परिषद को 21वीं सदी की दुनिया को दर्शाना चाहिए, न कि 1945 के युद्ध के फौरन बाद वाले दौर को." उन्होंने जोड़ा, "इसीलिए हम यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे कि ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) को खास तौर पर वहां ज्यादा मजबूत भूमिका दी जाए."
जर्मनी, सुरक्षा परिषद के 2027-28 के कार्यकाल में एक अस्थाई सीट के लिए जून 2026 में चुनाव लड़ेगा. सुरक्षा परिषद में यूएन के 193 सदस्य देशों में से 15 देश शामिल होते हैं. पांच परमाणु शक्तियां और दूसरे विश्व युद्ध के विजेता देश इसके स्थायी सदस्य हैं. ये पांच हैं- अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस. इन पांचों के पास, यूएनएससी के किसी भी प्रस्ताव पर वीटो करने यानी उसे एकतरफा रोकने का अधिकार है. बाकी 10 सीटें हर दो साल में अन्य सदस्य देशों के बीच बदलती रहती हैं.
जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने बीते नवंबर में, अंगोला में हुई ईयू-अफ्रीका समिट के दौरान कहा था कि वे सुरक्षा परिषद में दो स्थाई अफ्रीकी सीटों की मांग का समर्थन करते हैं. दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और परमाणु शक्ति भारत भी यूएनएससी में एक स्थाई सीट चाहता है, जिसके लिए वह अपने सहयोगी देशों से लगातार समर्थन जुटाता रहा है.
चीन जन्म दर बढ़ाने के लिए कॉन्डम पर लगा रहा टैक्स
चीन में 1 जनवरी, 2026 से कॉन्डम और अन्य गर्भनिरोधक दवाओं पर 13 फीसदी टैक्स लगना शुरू हो गया है क्योंकि सरकार ने इन उत्पादों पर तीन दशकों से मिल रही टैक्स छूट को खत्म कर दिया है. अब इन उत्पादों पर उतना ही टैक्स लग रहा है, जितना रोजमर्रा के ज्यादातर सामानों पर लगता है. इस कदम के पीछे, चीन का उद्देश्य जन्म दर में बढ़ोतरी लाना है.
आबादी के मामले में कभी दुनिया में सबसे ऊपर रहने वाला चीन, अब भारत से पीछे हो गया है. साल 2024 में वहां लगातार तीसरे साल जनसंख्या में कमी दर्ज की गई. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह गिरावट जारी रहेगी. इस स्थिति से निपटने के लिए चीन चाहता है कि उसकी युवा आबादी अब अधिक बच्चे पैदा करे. इसके लिए सरकार तमाम तरह के उपाय भी कर रही है.
चीन ने बीते साल बच्चों की देखरेख के लिए सालाना करीब 500 डॉलर की सब्सिडी देने की शुरुआत की. इससे पहले देश ने अपने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से कहा था कि वे छात्र-छात्राओं को 'लव एजुकेशन' दें, जिसमें शादी, प्यार, बच्चे और परिवार को एक सकारात्मक नजरिए से दिखाया जाए. इन उपायों के जरिए चीन अपने युवाओं को बच्चे पैदा करने के लिए आकर्षित करना चाहता है.
राहुल गांधी बोले, "इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा और प्रशासन नींद में रहा"
इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का बयान आया है. साथ ही बीजेपी नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी इस घटना के लिए राज्य के शासन और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है. वहीं, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने राज्य सरकार से पूछा है कि दूषित पानी पीने से कितने लोगों की मौत हुई और कितने लोग संक्रमित हुए.
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी इस घटना का खुद संज्ञान लिया है. आयोग ने अपने बयान में लिखा, "खबरों के मुताबिक, स्थानीय लोग कई दिनों से दूषित पानी की आपूर्ति होने की शिकायत कर रहे थे, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया." आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव से इस मामले में दो हफ्तों के अंदर रिपोर्ट देने के लिए कहा है.
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी इस मसले पर कई सवाल पूछे हैं. उन्होंने एक्स पर पूछा, "लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की, फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई? सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते सप्लाई बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी?" उन्होंने आगे लिखा कि साफ पानी एहसान नहीं, बल्कि जीवन का अधिकार है.
पूर्व सीएम उमा भारती ने एक्स पर लिखा, "साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें, हमारा प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं." उन्होंने मृतकों को मुआवजे में सिर्फ दो लाख रुपये देने पर भी सवाल उठाया. उन्होंने लिखा, "जिंदगी की कीमत दो लाख रुपए नहीं होती क्योंकि उनके परिजन जीवन भर दुख में डूबे रहते हैं."
जर्मनी में गैर-कानूनी तरीके से दाखिल होने वाले लोगों की संख्या घटी
जर्मनी में गैर-कानूनी तरीके से दाखिल होने के मामलों में कमी आई है. जर्मनी की बॉर्डर पुलिस ने ताजा आंकड़े जारी किए हैं, जिनके मुताबिक, 2025 में अवैध प्रवेश के 62,526 मामले दर्ज किए गए. यह जर्मनी की जमीनी, हवाई और समुद्री सीमाओं के जरिए गैर-कानूनी प्रवेश के कुल मामले हैं. 2024 में यह संख्या करीब 83,572 थी और 2023 में करीब 127,549.
2023 में कुछ महीने ऐसे भी रहे, जहां गैर-कानूनी तरीके से जर्मन सीमा में घुसने के मामले 20 हजार तक पहुंच जाते थे. 2025 के आखिरी महीने में यह संख्या घटकर करीब 4600 रह गई है.
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सितंबर 2024 से, जर्मनी ने प्रवासियों के गैर-कानूनी प्रवेश को रोकने के लिए देश की सभी जमीनी सीमाओं पर पुलिस जांच फिर से शुरू कर दी. चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स के नेतृत्व में कंजर्वेटिव धड़े के सत्ता में आने के बाद, मई 2025 में गृह मंत्री आलेक्जांडर डोबरिंट ने सीमा पर जांच के नियमों को और सख्त कर दिया है. तब से, बॉर्डर पुलिस को शरण चाहने वालों को वापस लौटाने का निर्देश भी दिया गया है. हालांकि, बीमार लोगों या गर्भवती महिलाओं जैसे कुछ समूहों को इससे छूट मिली हुई है.
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शेंगेन एरिया के भीतर आमतौर पर सीमा जांच का प्रावधान नहीं है. शेंगेन एरिया में यूरोपीय संघ के ज्यादातर देशों के साथ-साथ आइसलैंड, लिष्टनश्टाइन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड भी शामिल हैं. लेकिन सुरक्षा खतरों या संकटों के मद्देनजर नियमों में छूट दी जा सकती है.
अफगानिस्तान में भारी बारिश के बाद अचानक आई बाढ़, 17 लोगों की मौत
अफगानिस्तान में हुई भारी बारिश और बर्फबारी ने सूखे का लंबा दौर तो खत्म कर दिया लेकिन इससे कई इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई. बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में वहां कम से कम 17 लोगों की मौत हुई है और 10 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. अफगानिस्तान के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रवक्ता मोहम्मद यौसफ हम्माद ने गुरुवार, 1 जनवरी को यह जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि ज्यादातर मौतें बाढ़ प्रभावित जिलों में इसी हफ्ते हुई हैं. खराब मौसम ने मध्य, उत्तरी, दक्षिणी और पश्चिमी इलाकों में जनजीवन भी अस्त-व्यस्त कर दिया है. हम्माद ने बताया कि बाढ़ के चलते बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, पशुओं की मौत हुई है और करीब 1800 परिवार प्रभावित हुए हैं.
भारत और पाकिस्तान की तरह, अफगानिस्तान में भी चरम मौसमी घटनाओं का खतरा काफी अधिक रहता है. अफगानिस्तान में दशकों के संघर्ष के चलते बुनियादी ढांचे की हालत भी ठीक नहीं है, जिससे प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना मुश्किल हो जाता है. खासकर दूरदराज के इलाकों में मिट्टी से बने घर, तेज बारिश और अचानक बाढ़ आने की स्थिति में ढह जाते हैं.
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने उमर खालिद के लिए लिखा पत्र
अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के नवनिर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी ने उमर खालिद के लिए एक पत्र लिखा है. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, उमर खालिद की साथी बानोज्योत्सना लाहिड़ी ने 1 जनवरी को सोशल मीडिया पर यह पत्र शेयर किया. इसके मुताबिक, ममदानी ने 2020 दिल्ली दंगे मामले में जेल में बंद उमर खालिद के माता-पिता से मुलाकात की थी. इस पत्र पर कोई तारीख नहीं लिखी है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि यह पत्र कब लिखा गया.
पत्र में ममदानी ने लिखा है, "प्रिय उमर, मैं अक्सर कड़वाहट पर आपके शब्दों के बारे में सोचता हूं और और इसे खुद पर हावी न होने देने के महत्व के बारे में सोचता हूं. आपके माता-पिता से मिलकर बहुत अच्छा लगा. हम सब आपके बारे में सोच रहे हैं."
ममदानी के अलावा, आठ अमेरिकी सांसदों ने भारत सरकार को पत्र लिखा है और मांग की है कि उमर खालिद को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिया जाए. डेमोक्रैट नेता जिम मैकगवर्न समेत इन आठ सांसदों ने अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा को संबोधित करते हुए यह पत्र लिखा है.
मैकगवर्न ने 30 दिसंबर को एक्स पर लिखा, "इस महीने मैंने उमर खालिद के माता-पिता से मुलाकात की, जो (खालिद) पांच साल से अधिक समय से बिना ट्रायल के, भारत की जेल में बंद हैं. जैमी रस्किन और मैं, हमारे साथियों का नेतृत्व करते हुए अपील करते हैं कि उन्हें (खालिद) जमानत दी जाए और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, निष्पक्ष एवं समयबद्ध सुनवाई हो."
ईरान में सत्ता विरोधी प्रदर्शन तेज, सात लोगों की मौत की खबर
ईरान की बिगड़ती अर्थव्यवस्था से भड़के प्रदर्शन गुरुवार, 1 जनवरी को देश के ग्रामीण प्रांतों में फैल गए. ईरानी मीडिया ने अब तक कम से कम सात लोगों की मौत की खबरें दी हैं. इसमें सुरक्षा बल और प्रदर्शनकारियों- दोनों तरफ से जानें गई हैं. हालिया प्रदर्शन 2022 के बाद से ईरान में सबसे बड़े स्तर के हैं. उस वक्त पुलिस हिरासत में 22 साल की महसा अमीनी की मौत ने देशभर में शासन विरोधी लहर पैदा कर दी थी. अमीनी को प्रशासन के नियमों के मुताबिक हिजाब ना पहनने पर हिरासत में लिया गया था.
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फिलहाल, अभी के प्रदर्शन पूरे देश में नहीं फैले हैं और वे उतने उग्र भी नहीं हैं जितने अमीनी की मौत के वक्त थे. बीते तीन दिनों में सबसे ज्यादा हिंसा ईरान के लोरेस्तान प्रांत के अजना शहर में होती दिखी, जो राजधानी तेहरान से करीब 300 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है. सरकार की करीबी फारस न्यूज एजेंसी ने यहां तीन लोगों के मारे जाने की खबर दी है. सुधारवादी मीडिया संस्थानों ने भी इस रिपोर्ट के लिए फारस न्यूज का हवाला दिया, जबकि सरकारी मीडिया ने वहां या कहीं और हुई हिंसा को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया है.
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अर्थव्यवस्था बिगड़ने और देश की मुद्रा रियाल के कमजोर होने के पीछे पश्चिमी देशों और संयुक्त राष्ट्र की ओर से लगे प्रतिबंध भी हैं. ईरान और पश्चिमी देश, ईरानी परमाणु कार्यक्रम से जुड़े किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं. ईरान ने कहा है कि वह अब देश में किसी भी जगह यूरेनियम संवर्धन नहीं कर रहा है. ईरानी नेतृत्व पश्चिम को यह संकेत देने की कोशिश कर रहा है कि वह प्रतिबंधों को कम करने के लिए अपने परमाणु कार्यक्रम पर संभावित बातचीत के लिए खुला है.