देश की खबरें | वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली में एक अक्टूबर से लागू होगी ‘बेहतर’ योजना

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नयी दिल्ली, 29 सितंबर वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक ‘बेहतर’ चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्रवाई योजना (जीआरएपी) को एक अक्टूबर से लागू कर दिया जाएगा और पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष अग्रिम कार्रवाई से गंभीर प्रदूषण की समस्या में कमी आएगी।

इससे पहले, जीआरएपी को 15 अक्टूबर से अमल में लाया जाना था।

जीआरएपी दिल्ली और आसपास के इलाकों में हालात की गंभीरता के अनुरूप वायु प्रदूषण रोधी उपायों का एक समूह है।

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता के प्रबंधन के लिए जीआरएपी को अग्रिम तिथि से लागू करने का निर्णय लेने के वास्ते अगस्त 2021 में स्थापित वैधानिक निकाय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने जनता और विशेषज्ञों के उन सुझावों पर विचार किया है, जिसमें कहा गया है कि अग्रिम कार्रवाई से वायु गुणवत्ता को बेहद खराब होने से रोका जा सकता है।

इससे पहले, अधिकारी प्रदूषक तत्वों पीएम2.5 और पीएम10 के एक विशेष सीमा को छूने के बाद ही उपायों को लागू करते थे।

इस बार, प्रतिबंध पीएम2.5 और पीएम10 के स्तर के बजाय वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) की स्थिति पर आधारित होंगे।

विज्ञान और पर्यावरण केंद्र में स्वच्छ वायु कार्यक्रम के वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक विवेक चट्टोपाध्याय ने कहा कि हालात बिगड़ने से पहले उठाए गए रोकथाम संबंधी कदम से वायु गुणवत्ता को अचानक खराब होने से बचा जा सकता है, जब तक कि मौसम की परिस्थितियां बिल्कुल प्रतिकूल नहीं हों।

ऊर्जा एवं स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र के विश्लेषक सुनील दहिया ने उम्मीद जताई कि अग्रिम कार्रवाई से वायु गुणवत्ता के बेहद खराब होने की घटनाओं में कमी आएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, केवल निरंतर जागरूकता अभियान और सभी हितधारकों के साथ लगातार संवाद से ही पराली जलाने जैसी समस्याओं का समाधान होगा। पराली जलाने की अवधि से ठीक पहले की गई कार्रवाई से अच्छे परिणाम मिलने की संभावना नहीं है।’’

अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली में पर्यावरण विभाग ऐसी प्रणाली का उपयोग करेगा, जो वास्तविक समय में सभी प्रदूषण स्रोतों के योगदान का पता लगाने में मदद करेगा।

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में कृषि अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख डॉ महेश नारंग ने कहा कि ‘‘बेहतर’’ जीआरएपी और शुरुआती समय में उठाए गए रोकथाम कदमों से पिछले साल दिवाली पर और उसके बाद के दिनों में पराली और पटाखे जलाने के कारण प्रदूषण बढ़ने से उत्पन्न वायु गुणवत्ता संकट की पुनरावृत्ति को रोक जा सकता है।

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