इस्लामाबाद, 27 फरवरी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने रविवार को कहा कि वह बातचीत के जरिए विवादों को सुलझाने में विश्वास करते हैं लेकिन इसे उनके देश की ‘‘कमजोरी’’ के तौर पर नहीं लेना चाहिए।
खान ने कहा, ‘‘जैसा कि हमने 27 फरवरी 2019 को भारत को दिखाया, जब उसने हम पर हमला करने का रास्ता चुना। राष्ट्र द्वारा समर्थित हमारे सशस्त्र बल सैन्य आक्रमण का जवाब देंगे और सभी स्तरों पर प्रबल होंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने देश की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में दृढ़ और अडिग हैं।’’
पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद 26 फरवरी 2019 को तड़के भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के आतंकी शिविरों पर बमबारी की। पुलवामा हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 40 जवान शहीद हो गए थे।
बालाकोट में आतंकी ठिकाने पर भारत की कार्रवाई के अगले दिन दोनों देशों के बीच हवाई झड़प हुई, जिसमें भारतीय वायु सेना के पायलट को पकड़ लिया गया और बाद में पाकिस्तान ने रिहा कर दिया।
खान ने कहा कि वह बातचीत के जरिए विवादों को सुलझाने के पक्ष में हैं। प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘मैंने हमेशा बातचीत और कूटनीति के माध्यम से विवादों को सुलझाने में विश्वास किया है। इसे कभी भी कमजोरी के संकेत के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।’’
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार ने कहा कि 27 फरवरी को ‘ऑपरेशन स्विफ्ट रिटॉर्ट’ की तीसरी वर्षगांठ है, जब पाकिस्तान के सशस्त्र बलों ने ‘‘भारतीय असफल दुस्साहस’’ का करारा जवाब दिया। इससे पहले, विदेश कार्यालय ने कहा, ‘‘पाकिस्तान हर कीमत पर अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के अपने संकल्प को दोहराता है।’’
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