देश की खबरें | बैडमिंटन भारत में तेजी से उभरता हुआ खेल, भविष्य भी उज्ज्वल है: गोपीचंद

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बैडमिंटन के राष्ट्रीय मुख्य कोच पी गोपीचंद ने रविवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर पीवी सिंधु और साइना नेहवाल की प्रेरणादायक सफलता ने बैडमिंटन को पिछले एक दशक में भारत का सबसे तेजी से लोकप्रिय होने वाला खेल बना दिया है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 19 जुलाई बैडमिंटन के राष्ट्रीय मुख्य कोच पी गोपीचंद ने रविवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर पीवी सिंधु और साइना नेहवाल की प्रेरणादायक सफलता ने बैडमिंटन को पिछले एक दशक में भारत का सबसे तेजी से लोकप्रिय होने वाला खेल बना दिया है।

गोपीचंद ने कहा कि उन्होंने 2004 में हैदराबाद में जब सिंधु, साइना और के श्रीकांत सहित 25 प्रशिक्षुओं को कोचिंग देना शुरू किया था तब किसी ने नहीं सोचा था कि भारत विश्व स्तर के ऐसे खिलाड़ियों को पैदा करेगा।

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उन्होंने एक वेबिनार के दौरान कहा, ‘‘ मैं कह सकता हूं कि यह (बैडमिंटन) पिछले 10 वर्षों में सबसे ज्यादा प्रगति करने वाला खेल है। जब मैंने अपना कोचिंग करियर 2004 में शुरू किया था, तब हैदराबाद में सिर्फ 10 अच्छे कोर्ट थे लेकिन अब इसकी संख्या 1000 से ज्यादा हैं।’’

भारतीय कोच ने कहा, ‘‘ देश में अब कई अकादमियां शुरु हो गयी है। मेरी अकादमी में पंजाब, मिजोरम और यहां तक की विदेशों से बच्चे प्रशिक्षण लेने आ रहे हैं। एक बच्चे के अभिभावक ने तो हैदराबाद में रहने का मन बना लिया ताकि प्रशिक्षण में समस्या ना आये। इस खेल में दिलचस्पी काफी बढ़ी हैं।’’

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बैडमिंटन के भविष्य को उज्ज्वल बताते हुए गोपीचंद ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में खेल खेलने की लागत में कम हो जाएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘ आने वाले दिनों में भारत से और विश्वस्तरीय खिलाड़ी निकलेंगे। इसके अलावा, सिंथेटिक शटल की शुरूआत के साथ अगले कुछ वर्षों में शटल की लागत कम होने जा रही है। यह आने वाले वर्षों में खेल को और अधिक लोकप्रिय बनायेगा।’’

उन्होंने कहा कि 1980 में प्रकाश प्रदुकोण का ऑल इंग्लैंड खिताब भारतीय बैडमिंटन के निर्णायक क्षणों में से एक था। उन्होंने 2001 में ऑल इंग्लैंड चैम्पियपन बनने को अपनी सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि बताया।

इस 46 साल के कोच ने खिलाड़ियों से कोविड-19 से जुड़ी अनुशासन के पालन करने को कहा।

उन्होंने कहा, ‘‘हम जून, फिर जुलाई, अगस्त (खेल को फिर से शुरू करने के लिए) के बारे में सोच रहे थे और अब लोग सितंबर के बारे में सोच रहे हैं। कोई नहीं जानता कि खेल कब शुरू होगा। जरूरी बात यह है कि खेल फिर से शुरू होने पर खिलाड़ियों को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार होना होगा।’’

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