विदेश की खबरें | ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसॉर्डर के कारण युवाओं में खुद को चोट पहुंचाने की प्रवृत्ति अधिक : अध्ययन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी.

लंदन, एक मई (द कन्वरसेशन) युवाओं में खुद को चोट पहुंचाने की प्रवृत्ति आम है और यह 18 साल की उम्र में पहुंचने तक लगभग हर पांच में से एक किशोर में पाई जाती है।

अस्पतालों के आपातकालीन विभाग में किशोरों में आठ में से केवल एक ऐसा मामला सामने आता है। खुद को चोट पहुंचाने के लिए अस्पताल में भर्ती होना भविष्य में आत्महत्या के जोखिम का एक प्रमुख कारण बनता है।

हमने अपने नए प्रकाशित अध्ययन में खुद को चोट पहुंचाने के कुछ कारणों की पहचान की है, जिसमें अस्पताल से प्राप्त सूचना के साथ अन्य जानकारियों जैसे स्कूल में उपस्थिति, विशेष शैक्षणिक आवश्यकता और स्कूल में मिलने वाले मुफ्त भोजन की परिस्थितियों का समावेश किया गया है।

इसे ‘डेटा लिंकेज’ कहा जाता है, जिसमें किसी व्यक्ति से जुड़े जानकारी के स्रोतों का समावेश कर उसका विश्लेषण होता है। खुद को चोट पहुंचाना एक ऐसा कृत्य है, जो किसी भी चीज से प्रेरित हो सकता है। आमतौर पर लोग दवा की ज्यादा खुराक ले लेते हैं या फिर अपने शरीर के किसी अंग की नस काटकर घाव कर लेते हैं।

हमारे अध्ययन में पाया गया कि खुद को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति ऐसे लड़कों में लगभग तीन गुना ज्यादा होती है, जिन्हें ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसॉर्डर (एएसडी) था। एएसडी का खतरा लड़कियों में कम देखा गया है, हालांकि ऐसा इसलिए हो सकता है कि क्योंकि लड़कियों में एएसडी का पता नहीं चल पाता। आमतौर पर खुद को चोट पहुंचाने का खतरा लड़कों (0.3 प्रतिशत) की अपेक्षा लड़कियों (1.5 प्रतिशत) में ज्यादा दर्ज किया गया है।

हमने यह भी पाया कि जो युवा स्कूल नहीं जाते, उनमें खुद को चोट पहुंचाने का खतरा ज्यादा होता है। स्कूल में जिनकी उपस्थिति 80 फीसदी से कम होती है, उनमें खुद को चोट पहुंचाने का खतरा उन किशोरों की तुलना में तीन प्रतिशत अधिक होता है, जिनकी उपस्थिति 80 प्रतिशत से ज्यादा होती है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now