मुंबई, 15 फरवरी शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने बृहस्पतिवार को कहा कि उप मुख्यमंत्री अजित पवार के खेमे को असली राकांपा करार देने का महाराष्ट्र के विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर का फैसला ‘‘हास्यास्पद’’ है और यह शिवसेना मामले उनके द्वारा किये गये फैसले का ‘‘कॉपी-पेस्ट’’ है।
राकांपा संस्थापक शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने आरोप लगाया कि एक ‘‘अदृश्य शक्ति’’ महाराष्ट्र के दोनों महत्वपूर्ण राजनीतिक दलों राकांपा और शिवसेना को खत्म करने की कोशिश कर रही है।
बारामती से सांसद ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘आप नार्वेकर से क्या उम्मीद कर सकते हैं। उनका निर्णय हास्यास्पद है और उन्होंने शिवसेना के मामले में जो किया है, यह फैसला उसी का कॉपी-पेस्ट है। एक अदृश्य शक्ति सक्रिय रूप से राज्य की दो महत्वपूर्ण पार्टी शिवसेना और राकांपा को समाप्त करने की कोशिश कर रही है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम इतने भी निष्कपट नहीं है। पूरे देश को नियमों, कानूनों और संवैधानिक मानदंडों को दरकिनार करके चलाया जा रहा है।’’
नार्वेकर ने फैसले में टिप्प्णी की थी कि पार्टी संस्थापक शरद पवार के फैसलों पर सवाल उठाना या उनकी इच्छा की अवहेलना करना दल-बदल नहीं है, बल्कि यह केवल एक आंतरिक असहमति है।
उन्होंने कहा कि दल-बदल निरोधक प्रावधानों से संबद्ध संविधान की 10वीं अनुसूची का इस मामले में दुरूपयोग किया गया। इस पर सुले ने कहा, ‘‘अदृश्य शक्ति जैसा निर्देश देती है, विधानसभा अध्यक्ष का कार्यालय उसी तरह काम करता है और कॉपी-पेस्ट निर्णय के साथ चलता है।’’
राकांपा की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष सुनील तटकरे ने फैसले पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले साल अजित पवार के नेतृत्व में लिया गया फैसला (शिवसेना-भाजपा सरकार में शामिल होने का) विधानसभा अध्यक्ष ने बरकरार रखा था।
उन्होंने कहा, ‘‘हम फैसले से खुश हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने संविधान का अध्ययन किया है और अपना फैसला सुनाया।’’
सुले की टिप्पणी पर तटकरे ने कहा, ‘‘कुछ लोग निराश हो गए हैं... 2014 के विधानसभा चुनावों के बाद, राकांपा ने भाजपा को बाहर से समर्थन दिया था। पार्टी ने 2016-17 में भाजपा के साथ सरकार में शामिल होने का फैसला किया था। अंदरखाने एक चर्चा हुई थी पार्टी और सभी 53 विधायकों ने इसका समर्थन किया था। सरकार (भाजपा में) में शामिल होने की यह प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी।’’
उन्होंने कहा कि जब अजित पवार राज्य सरकार में शामिल हुए थे तो कम से कम 43 विधायक उनके साथ थे।
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह फैसला ‘‘अपेक्षित’’ था।
राज्य के पूर्व मंत्री ने कहा, ‘‘जिन लोगों ने राकांपा का गठन किया, उनका अब इससे कोई लेना-देना नहीं है। जो लोग पार्टी छोड़कर भाग गए वे नये प्रमुख हैं। यही फैसला शिवसेना के मामले में भी दिया गया था। विधानसभा अध्यक्ष को एक न्यायाधिकरण के रूप में काम करना चाहिए था, लेकिन उनका यह फैसला अप्रत्याशित नहीं था।’’
महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री एवं राकांपा के दिग्गज नेता छगन भुजबल ने कहा कि चुनाव आयोग पहले ही अजित पवार के खेमे वाले गुट के पक्ष में फैसला दे चुका है और इसे ही असली राकांपा मानता है।
उन्होंने कहा, ‘‘ इससे हमारा मामला अध्यक्ष के समक्ष मजबूत हो गया।’’
शरद पवार के वफादार विधायक जितेंद्र अव्हाड ने कहा कि यह फैसला लोकतंत्र का मजाक है जो ‘‘महाराष्ट्र की राजनीति को गंदा कर देगा।’’
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