देश की खबरें | अनुच्छेद 370: संवैधानिक ढांचे की एकात्मक विशेषताएं केंद्र को देती हैं कहीं अधिक शक्तियां: न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि ‘लोकतंत्र और संघवाद’ संविधान की मूल विशेषताएं हैं, हालांकि संवैधानिक ढांचे में कुछ विशेष ‘एकात्मक’ विशेषताएं भी हैं जो केंद्र शासित प्रदेशों का गठन करने एवं अन्य विषयों के संबंध में केंद्र को कहीं अधिक शक्तियां देती हैं।

नयी दिल्ली, 11 दिसंबर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि ‘लोकतंत्र और संघवाद’ संविधान की मूल विशेषताएं हैं, हालांकि संवैधानिक ढांचे में कुछ विशेष ‘एकात्मक’ विशेषताएं भी हैं जो केंद्र शासित प्रदेशों का गठन करने एवं अन्य विषयों के संबंध में केंद्र को कहीं अधिक शक्तियां देती हैं।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ द्वारा अपने, और न्यायमूर्ति बी आर गवई तथा न्यायमूर्ति सूर्यकांत की ओर से लिखे गए फैसले में यह टिप्पणी की गई। उन्होंने पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने संबंधी केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई करने के बाद यह कहा।

उच्चतम न्यायालय ने पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के केंद्र सरकार के फैसले को सोमवार को सर्वसम्मति से बरकरार रखा।

न्यायालय ने केंद्र शासित प्रदेश (जम्मू कश्मीर) का राज्य का दर्जा ‘‘जल्द से जल्द’’ बहाल किए जाने एवं अगले साल 30 सितंबर तक विधानसभा चुनाव कराने का भी निर्देश दिया।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने दशकों पुरानी बहस पर विराम लगाते हुए तीन अलग-अलग लेकिन सर्वसम्मति वाले फैसले सुनाए, जिनमें 1947 में भारत संघ में शामिल होने पर जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाली संवैधानिक व्यवस्था को निरस्त करने के फैसले को बरकरार रखा गया।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने अपने 352 पन्नों के प्रमुख फैसले में, पुनर्गठन अधिनियम को दी गई चुनौती पर गौर किया, जिसके तहत दो केंद्र शासित प्रदेशों को, जम्मू कश्मीर और लद्दाख (को दो केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में) एक पूर्ण राज्य को विभाजित कर गठित किया गया था।

याचिकाओं में अधिनियम को विभिन्न आधार पर चुनौती दी गई थी, जिसमें यह भी शामिल था कि इसे अनुच्छेद 3 में आवश्यक शर्तों को पूरा किए बिना अधिनियमित किया गया था, जो संसद को किसी राज्य को पूरी तरह से समाप्त करने का अधिकार नहीं देता है।

अनुच्छेद 3 संसद को नए राज्यों के गठन, सीमाओं और मौजूदा राज्यों के नामों में परिवर्तन आदि से संबंधित विनियमन बनाने के लिए अधिकृत करता है।

प्रधान न्यायाधीश ने दलीलों और उनके जवाबों पर गौर करते हुए कहा, ‘‘लोकतंत्र और संघवाद संविधान की बुनियादी विशेषताएं हैं। ‘संघीय’ शब्द का उपयोग संघ या केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों के विभाजन को इंगित करने के लिए किया जाता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, संवैधानिक ढांचे में कुछ 'एकात्मक' विशेषताएं मौजूद हैं, जिनके संदर्भ में केंद्र सरकार के पास कुछ स्थितियों में कहीं अधिक शक्तियां हैं, संविधान द्वारा परिकल्पित सरकारों के रूप में संघीय तत्वों का अस्तित्व राज्य व्यवस्था की आधारशिला है।’’

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