विदेश की खबरें | तापमान बढ़ने के कारण दक्षिण की ओर जा सकती हैं ऑस्ट्रेलियाई पौधों की लगभग एक तिहाई प्रजातियां
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. सिडनी, 22 मार्च (द कन्वरसेशन) पारिस्थितिकी विज्ञानियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों में से एक यह समझना है कि जलवायु के तेजी से बदलने के साथ पारिस्थितिकी तंत्र कैसे बदलेगा। हम पहले ही देख रहे हैं कि पौधों और पशुओं की कई प्रजातियां बढ़ते तापमान के कारण ऊपरी स्थानों और ध्रुवों की ओर जा रही हैं। इसकी बहुत ज्यादा संभावना है कि ज्यादातर प्रजातियां अपने पसंदीदा तापमान वाले स्थानों की तलाश में निकलेंगी।
सिडनी, 22 मार्च (द कन्वरसेशन) पारिस्थितिकी विज्ञानियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों में से एक यह समझना है कि जलवायु के तेजी से बदलने के साथ पारिस्थितिकी तंत्र कैसे बदलेगा। हम पहले ही देख रहे हैं कि पौधों और पशुओं की कई प्रजातियां बढ़ते तापमान के कारण ऊपरी स्थानों और ध्रुवों की ओर जा रही हैं। इसकी बहुत ज्यादा संभावना है कि ज्यादातर प्रजातियां अपने पसंदीदा तापमान वाले स्थानों की तलाश में निकलेंगी।
लेकिन अजीब बात यह है कि कई प्रजातियां मौजूदा तापमान से कहीं अधिक तापमान में भी जीवित रह सकती हैं। हम अभी तक पूरी तरह से नहीं समझ पाए हैं कि तापमान पारिस्थितिकी तंत्र को इतनी दृढ़ता से क्यों प्रभावित करता है।
इस पहेली पर प्रकाश डालने के लिए हमारे नए शोध में ऑस्ट्रेलियाई पौधों की नयी श्रृंखला का इस्तेमाल किया गया और प्रत्येक प्रजाति की न्यूनतम व अधिकतम तापमान प्राथमिकताओं की गणना की गयी है। ये आंकड़े हमें बताते हैं कि औसतन वार्षिक तापमान में 15 डिग्री सेल्सियस से 16 डिग्री सेल्सियस तक बदलाव के कारण कितनी प्रजातियां खो चुकी हैं या पैदा हुई हैं।
परिणाम आश्चर्यजनक हैं। ऑस्ट्रेलिया के नमी वाले पूर्वी तट में तापमान में 1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने पर औसतन 19 फीसदी और प्रजातियां मिली और 14 प्रतिशत प्रजातियां लुप्त हो गयीं।
शुष्क मध्य हिस्से में, हर एक डिग्री तापमान बढ़ने पर 18 प्रतिशत प्रजातियां पैदा हुईं तथा 21 प्रतिशत प्रजातियां गंवा दी गयीं।
जब दुनिया तीन डिग्री सेल्सियस तक अधिक गर्म हो जाएगी तो क्या होगा?
अगर हम मान लें कि संपूर्ण वनस्पतियां अपने मौजूदा जलवायु स्थल की तलाश करने का प्रयास कर रही हैं तो हम ऑस्ट्रेलिया में अपने पौधों की 30 प्रतिशत प्रजातियों को दक्षिण की ओर बढ़ते हुए देखेंगे।
इसका क्या अर्थ है?
हमारे आंकड़ों से पता चलता है कि तापमान में मामूली प्राकृतिक बदलाव होने से विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद प्रजातियों पर असर पड़ता है।
लेकिन जलवायु तेजी से गर्म हो रही है। 2023 पहला वर्ष था जब पृथ्वी पूर्व-औद्योगिक काल के मुकाबले 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म रही।
तापमान के बढ़ने पर अधिक से अधिक प्रजातियां अपने पसंदीदा तापमान वाले स्थान की ओर जाएंगी। वे तापमान के अनुसार ढल जाएंगी, कहीं ओर चली जाएंगी या स्थानीय रूप से विलुप्त हो जाएंगी।
प्रमाण संकेत देते हैं कि प्रजातियां अगर जा सकती हैं तो अन्यत्र जाएंगी।
हम यह नहीं जानते कि क्या सभी प्रजातियां पूर्वी तट की ओर जाने में सक्षम होंगी। मकान, सड़कें, शहर से लेकर अन्य विकासात्मक अवसंरचनाएं बनाने के औद्योगिक प्रयासों ने प्राकृतिक वनस्पति को गहरा नुकसान पहुंचाया है। कभी बहुतायत वाली रिहायशों को हमने एक तरह से द्वीप जैसे अवशेषों में तब्दील कर दिया है।
बदलती परिस्थिति में डार्विन का ‘अस्तित्व के लिए संघर्ष और विजय’ का सिद्धांत एक बार फिर नजर आएगा जब अधिक दूर जाने वाली प्रजातियां जलवायु में आने वाले नए बदलाव में खुद को बचाने में कामयाब होंगी। भविष्य के लिए यहां एक अहम सवाल होगा जिसका हमारे पास फिलहाल जवाब नहीं है। यह सवाल है कि क्या हमें पौधों की उन प्रजातियों के बीजों को अन्यत्र ले जाने में मदद करना चाहिए जिनके बीज दूर तक नहीं जा सकते ?
द कन्वरसेशन
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